- खूसने के कगार पर पहुँच चुकी सई पर मडरा रहा अस्तित्व का खतरा
जौनपुर धारा,जौनपुर। सई और गोमती का दर्द एक रहा है, दोनों एक दूसरे के समानान्तर चलती हैं। लेकिन सई नदी सूखने की कगार पर पहुंच चुकी है। सई नदी का अस्तित्व न बचा तो गोमती भी खतरे में होगी। सई नदी हरदोई से निकलकर हुए कई जिलों को जोड़ते हुए जौनपुर में जाकर गोमती में मिलती है, फिर इसी सई नदी का पानी गोमती में समाहित होकर गाजीपुर में गंगा नदी से मिलता हैं। सई नदी में पानी कम होने से जीवन शैली बदल गई। सई नदी में पानी कम होते ही इसके किनारे रहने वालों का जीवन ही बदल गया। लगभग 25 साल पहले बच्चे नदी के किनारों से छलांग लगाया करते थे। पशुओं के पीने के पानी की चिंता नहीं थी। जिन गांव के किनारों से नदी निकली। वहां का जलस्तर हमेशा ऊंचा बना रहता था। भगवान राम को पवित्र करने वाली सई नदी के अस्तित्व पर इन दिनों खतरा मंडराने लगा है। नदी से नाला का रूप ले रही सई की कल-कल करते निकलने वाली धारा सिसक रही है। यही नहीं कहीं-कहीं तो नदी इतना सूख गई है कि लोग बालू की रेत पर चलकर पैदल ही नदी पार हो जा रहे हैं। तटवर्ती गांव के बुजुर्ग सई की दयनीय स्थिति पर ङ्क्षचता जता जता रहे हैं। सईं की पवित्र गंगा से तुलना तो नहीं की जा सकती लेकिन सई का ऐतिहासिक व धार्मिक महत्व कम नहीं है। नदी से नाला बन चुकी सई कुछ दिन बाद मात्र इतिहास रह जाएगी। वन से वापस आते हुए भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण ने जिस सई नदीं में स्नान कर रावण से युद्ध में गलतियों से अपने को पवित्र किया, वह अपनी पवित्रता स्वच्छता ही नहीं अस्तित्व खोने के कगार पर है।


