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महंगाई की मार और गैस किल्लत के बीच पिसती आम जनता

देश में बढ़ती गैस किल्लत और महंगाई ने आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। जमाखोरी और प्रशासनिक विफलताओं के बीच गरीब और मध्यम वर्ग सबसे अधिक प्रभावित हो रहा है।
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संयुक्त राष्ट्र ने तालिबान को दी चेतावनी

रोजा ओटुनबायेवा ने रॉयटर्स से कहा, “अगर महिलाओं को काम करने की अनुमति नहीं दी गई तो अफगानिस्तान की फंडिंग रोकी जा सकती है.” उन्होंने कहा कि छोटी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं या जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए दी जाने वाली मदद महिलाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों के बाद रुक गई है. तालिबान ने अगस्त 2021 में अफगानिस्तान की सत्ता पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया था. तालिबान का कहना है वो इस्लामी कानून के तहत महिलाओं के अधिकारों का सम्मान करता है. वहीं, संयुक्त अरब अमीरात में संयुक्त राष्ट्र की राजदूत लाना नुसेबीह ने कहा, “वो व्यवस्थित रूप से महिलाओं और लड़कियों को उनके मौलिक मानवाधिकारों से वंचित करते हैं. इन फैसलों का इस्लाम या अफगान संस्कृति से कोई लेना-देना नहीं है. रोजा ओटुनबायेवा ने बताया कि कुछ अफगान महिलाओं ने शुरू में कहा कि उन्होंने तालिबान के सत्ता में आने का स्वागत किया था, क्योंकि इससे युद्ध समाप्त हो गया था. हालांकि, उन्होंने तालिबान से जल्द ही उम्मीद खोनी शुरू कर दी. उन्होंने कहा, “तालिबान के शासन में अफगानिस्तान महिलाओं के अधिकारों के मामले में दुनिया में सबसे दमनकारी देश बना हुआ है. यह समझना मुश्किल है कि कोई भी सरकार अपनी आधी आबादी की जरूरतों के खिलाफ कैसे शासन कर सकती है.

UN On Taliban: संयुक्त राष्ट्र ने अफगानिस्तान पर शासन करने वाले तालिबान को चेतावनी दी है. संयुक्त राष्ट्र के दूत ने बुधवार (8 मार्च) को कहा कि महिलाओं के अधिकारों पर तालिबान प्रशासन की कार्रवाई की वजह से देश को दी जाने वाली सहायता में कटौती की जा सकती है. अफगानिस्तान में UN की दूत रोजा ओटुनबायेवा ने कहा कि तालिबान ने महिलाओं को यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेने से प्रतिबंधित कर दिया है, साथ ही महिलाएं पार्कों में नहीं जा सकती और बिना पुरुषों के बाहर नहीं निकल सकतीं, ऐसे में देश को दी जाने वाली मदद में कटौती की जा सकती है. रोजा ओटुनबायेवा ने रॉयटर्स से कहा, “अगर महिलाओं को काम करने की अनुमति नहीं दी गई तो अफगानिस्तान की फंडिंग रोकी जा सकती है.” उन्होंने कहा कि छोटी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं या जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए दी जाने वाली मदद महिलाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों के बाद रुक गई है.तालिबान ने अगस्त 2021 में अफगानिस्तान की सत्ता पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया था. तालिबान का कहना है वो इस्लामी कानून के तहत महिलाओं के अधिकारों का सम्मान करता है. वहीं, संयुक्त अरब अमीरात में संयुक्त राष्ट्र की राजदूत लाना नुसेबीह ने कहा, “वो व्यवस्थित रूप से महिलाओं और लड़कियों को उनके मौलिक मानवाधिकारों से वंचित करते हैं. इन फैसलों का इस्लाम या अफगान संस्कृति से कोई लेना-देना नहीं है. रोजा ओटुनबायेवा ने बताया कि कुछ अफगान महिलाओं ने शुरू में कहा कि उन्होंने तालिबान के सत्ता में आने का स्वागत किया था, क्योंकि इससे युद्ध समाप्त हो गया था. हालांकि, उन्होंने तालिबान से जल्द ही उम्मीद खोनी शुरू कर दी. उन्होंने कहा, “तालिबान के शासन में अफगानिस्तान महिलाओं के अधिकारों के मामले में दुनिया में सबसे दमनकारी देश बना हुआ है. यह समझना मुश्किल है कि कोई भी सरकार अपनी आधी आबादी की जरूरतों के खिलाफ कैसे शासन कर सकती है.

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