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जंतर-मंतर की घटना की निष्पक्ष जांच की मांग, राष्ट्रपति और मानवाधिकार आयोग को भेजा ज्ञापन

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान कथित हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघन की घटना को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। संगठन ने राष्ट्रपति, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन भेजकर घायलों को न्याय और सहायता दिलाने की मांग की।
Homeअपना जौनपुरशिक्षण प्रशिक्षण कौशल आधारित बनाया जाए : प्रो.अजय चतुर्वेदी

शिक्षण प्रशिक्षण कौशल आधारित बनाया जाए : प्रो.अजय चतुर्वेदी

  • शिक्षा मानवीय पुनरुत्थान का आधार : प्रो.राकेश कुमार
  • एक दिवसीय नेशनल सेमिनार मे दो पुस्तकों का विमोचन

जौनपुर धारा,जौनपुर। एक होटल के सभागार में एक दिवसीय नेशनल सेमिनार आयोजित किया गया। जिसका मुख्य विषय विभिन्न स्तर पर शिक्षण अधिगम और शोध में एनईपी 2020 का निहितार्थ प्रभाव एवं उपयोगिता रहा। मुख्य अतिथि प्रो.अजय कुमार चतुर्वेदी, पूर्व प्रोवीसी, वीर टिकेंद्रजीत विश्वविद्यालय इंफाल (मणिपुर) एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित करके कार्यक्रम का शुरूआत किया। सेमिनार में उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड आदि राज्यों से चौदह शोधकर्ताओं ने प्रत्यक्ष पेपर प्रजेंटेशन दिया। ऑफलाइन मोड में छिहत्तर शिक्षा प्रेमी तथा आनलाइन मोड मे सैकड़ों लोगों ने सहभागिता की। मुख्य अतिथि प्रो.अजय कुमार चतुर्वेदी ने सम्बोधित करते हुए कहा कि मातृभाषा जिसे पालने की भाषा भी कहते हैं, उसी में प्रारंभिक शिक्षा दिया जाए तभी आने वाली पीढ़ी का भविष्य बेहतर होगा क्योंकि बच्चे शुरुआत में मां के हाव से सीखते हैं। बच्चे जैसे जैसे बड़े होते हैं वैसे वैसे माता पिता, परिवार, पड़ोस आदि के सम्पर्क में आने लगता है। इससे पूर्व लालसाहब यादव पूर्व एआरपी बख्शा ने कहा कि यह नेशनल सेमिनार ज्वलंत मुद्दा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर केंद्रित है। विशिष्ट अतिथि एनएसएस के पूर्व समन्वयक प्रो.राकेश कुमार यादव ने कहा कि भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति में शिक्षा ही मानवीय जीवन के पुनरुत्थान का आधार रही है और हैं भी। शिक्षा ऐतिहासिक दृष्टिकोण से देश काल एवं परिस्थितियों के अनुसार करवट बदलती रहती है। इक्कीसवीं सदी की मांग है कि अन्तर्राष्ट्रीय भाषा के साथ साथ मातृभाषा, क्षेत्रीय भाषा एवं राष्ट्रीय भाषा को महत्व दिया जाएं। पूर्व प्राचार्य एसडीटीटीसी, हजारीबाग झारखंड ने कहा कि शिक्षा का शाब्दिक अर्थ सीखना और सीखाना होता है इसके साथ एक और अर्थ यह है कि शिक्षा बालक की जन्मजात शक्तियों को बाहर निकालकर उसे भविष्य के तैयार करती है। असि. प्रो.डॉ.योगेश कुमार ने कहा कि शिक्षा साध्य है साधन नहीं। शिक्षा वास्तव में उपभोग है। यही कारण है कि शिक्षा के विभिन्न अंगों जैसे छात्र, शिक्षक, पाठ्यक्रम, तकनीकी आदि के मूल स्वरूप बदल गया है। इस नेशनल सेमिनार की अध्यक्षता कर रहे प्रो.अजय कुमार दूबे एवं डॉ.जय किशन यादव ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर सेमिनार से शिक्षा स्तर में सुधार होता है। सेमिनार का आयोजन डॉ.अरविंद कुमार यादव प्राचार्य श्री भगवान प्रसाद सिंह मेमोरियल बीएड कॉलेज औरंगाबाद बिहार ने कराया। संचालन डॉ.बृजबिहारी यादव ने किया। इस अवसर पर  दो पुस्तकों बाल्यावस्था एवं उसका विकास तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: समग्र अध्ययन का विमोचन हुआ। उक्त अवसर पर शैलेश कुमार, नायब तहसीलदार आजमगढ़, एनएसएस समन्वयक प्रो.राजबहादुर यादव, दिनेश कुमार, श्रवण कुमार, अवधेश कुमार, डॉ.संजय यादव, मस्तराम यादव, मांधाता, भारतेन्दु, मैनबहादुर, शतेन्द्र, अनुराग कुमार, संतोष पाण्डेय, विनय सिंह, प्रिंस शर्मा उपस्थित रहें।