Become a member

Get the best offers and updates relating to Liberty Case News.

― Advertisement ―

spot_img
Homeअपना जौनपुरमानकविहीन नर्सिंग होम का बोलबाला, स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहा...

मानकविहीन नर्सिंग होम का बोलबाला, स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहा सवाल

बिना विशेषज्ञ डॉक्टर के हो रहे ऑपरेशन, मरीजों की जान से खिलवाड़

रामसरन यादव

जौनपुर धारा, केराकत। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा भ्रष्टाचार पर सख्ती और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल विपरित नजर आ रही है। जहाँ स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारी सरकारी नियमों को ताख पर रखकर कार्य कर रहे हैं। खास बात यह है कि केराकत क्षेत्र में इन भ्रष्ट अधिकारियों और मानकों को दरकिनार कर चल रहे निजी नर्सिंग होमों पर चिकित्सा विभाग को चाबुक नहीं चल रहा है। क्योंकि इनके पीछे कहीं न कहीं प्रशासन की मिलीभगत मानी जा रही है।

प्राइवेट अस्पतालों को खोलने और संचालित करने के लिए सरकार ने सख्त निर्देश नियम-कानून बनाए हैं, लेकिन हकीकत यह है कि जनपद के चर्चित तहसील केराकत में लगभग सभी निजी अस्पताल इन नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। कई नर्सिंग होमों में ऐसे चिकित्सक कार्यरत हैं जिनके पास न तो कोई मान्यता प्राप्त डिग्री है और न ही कोई विशेषज्ञता, इसके बावजूद वे गंभीर ऑपरेशन करने से भी नहीं हिचकते। इन अस्पतालों में इलाज के नाम पर मरीजों की जिंदगी से खुला खेल खेला जा रहा है, और आश्चर्य की बात यह है कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस पूरे मामले पर पूरी तरह मौन साधे हुए हैं।

जनता की कमाई पर चल रहा है लूट का खेल

इन अस्पतालों ने गरीब जनता की खून-पसीने की कमाई को लूटने का अड्डा बना लिया है। डॉक्टर को भगवान मानने वाली जनता अब ठगी और लापरवाही का शिकार हो रही है। नर्सिंग होम संचालकों ने चिकित्सा सेवा को व्यवसाय बना लिया है और मौत के सौदागर बन चुके हैं। नगर से लेकर गांव तक, तमाम इलाकों में अवैध रूप से अस्पताल संचालित हो रहे हैं, जिनमें प्रशिक्षित डॉक्टर तो दूर, योग्य नर्सिंग स्टाफ तक नहीं है। नर्सिंग होम एक्ट और अन्य आवश्यक लाइसेंस के बिना ये अस्पताल बेरोकटोक चल रहे हैं।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दलाली का बोलबाला, रजिस्ट्रेशन के नाम पर रिश्वतखोरी

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र केराकत भी किसी दलालों के अड्डे से कम नहीं रह गया है। सूत्रों की मानें तो यहां बेहतर इलाज के नाम पर खुलेआम पैसों की मांग की जाती है ।सवाल यह उठता है कि क्या इस रिश्वतखोरी में स्टाफ शामिल हैं, या फिर अधिकारियों की भी मिलीभगत है? यह जांच का विषय है।

उच्च अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल

जिले में मानकविहीन अस्पतालों की भरमार और प्रशासनिक चुप्पी से आमजन में आक्रोश है। सूत्रों की मानें तो स्वास्थ्य विभाग को इन अस्पतालों के अवैध गतिविधियों की पूरी जानकारी रहती है, लेकिन विभागीय संरक्षण के चलते अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। यह बड़ा सवाल है कि क्या जिले के उच्च अधिकारी और जिला प्रशासन इस गोरखधंधे पर लगाम लगाने में सक्षम हैं या यह भ्रष्ट व्यवस्था यूं ही आम जनता की जान से खेलते रहेंगे?

Share Now...