जौनपुर धारा, जौनपुर। सर्वेश्वर भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रज में अनेकानेक बाल लीलाएं कीं, जो वात्सल्य भाव के उपासकों के चित्त को अनायास ही आकर्षित करती हैं। जो भक्तों के पापों का हरण कर लेते हैं, वही हरि है। क्षेत्र के तालामझवारा ग्राम सभा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन वृहस्पतिवार को कथा का काशी से पधारे कथावाचक पंडित आचार्य प्रमोद त्रिवेदी महाराज द्वारा कथा रसपान कराते हुए कहा। कथा आरंभ रविशंकर, हरिशंकर, रमेश धर्मेंद्र चौबे द्वारा व्यास पूजन किया गया तत्पश्चात कथा रसपान कराया गया। कहा कि नंदालय में गोपियों का तांता लगा रहता है। हर गोपी भगवान से प्रार्थना करती है कि किसी न किसी बहाने कन्हैया मेरे घर पधारें जिसकी भगवान के चरणों में प्रगाढ़ प्रीति है, वही जीवन्मुक्त है। एक बार माखन चोरी करते समय मैया यशोदा आ गईं तो कन्हैया ने कहा कि मैया तुमने इतने मणिमय आभूषण पहना दिए हैं जिससे मेरे हाथ गर्म हो गए हैं तो माखन की हांडी में हाथ डालकर इन हाथों को शीतलता प्रदान कर रहा हूं। कथा में श्रीकृष्ण-रूक्मणि के विवाह का आयोजन किया गया। भगवान का मथुरा प्रस्थान, कंस का वध, महर्षि संदीपनी के आश्रम में विद्या ग्रहण करना, कालयवन का वध, ऊधव गोपी संवाद, ऊधव द्वारा गोपियों को अपना गुरु बनाना, द्वारका की स्थापना एवं रुक्मणि विवाह के प्रसंग का संगीतमय भावपूर्ण पाठ किया गया। आचार्य ने कहा कि महारास में भगवान श्रीकृष्ण ने बांसुरी बजाकर गोपियों का आह्वान किया और महारास लीला के द्वारा ही जीवात्मा परमात्मा का ही मिलन हुआ। जीव और ब्रह्म के मिलने को ही महारास कहते है। कथा पंडाल में पडित राजेश मिश्रा पूर्व प्रधान, आरती चौबे पूर्व प्रधान, सुषमा चौबे, राहुल यादव, संदीप उपाध्याय, भेले मास्टर, संजय सिंह, जयशंकर यादव, देवेश मिश्रा समेत भारी संख्या में श्रोतागण मौजूद रहे।
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जो भक्तों के पापों का हरण कर ले वही हरि : प्रमोद त्रिवेदी

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