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पुश्तैनी जमीन के लिये दर-दर भटक रही बुजुर्ग महिला

जौनपुर। शाहगंज क्षेत्र में एक भावुक करने वाला मामला सामने आया है जहां बुजुर्ग महिला सरला देवी अपनी ही पुश्तैनी जमीन पर हक पाने...
Homeअपना जौनपुरसरकार की साख पर बट्टा लगा रहे 'कलम के सिपाही’

सरकार की साख पर बट्टा लगा रहे ‘कलम के सिपाही’

  • सुविधा शुल्क न मिलने पर लेखपाल ने लगाई विवादित रिपोर्ट, उत्तराधिकारियों की बढ़ी मुश्किलें

जौनपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जहाँ एक ओर राजस्व मामलों के त्वरित निस्तारण और पारदर्शिता की कसम खाते नहीं थकते, वहीं जौनपुर के खालीसपुर गांव में धरातल की हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। यहाँ के लेखपाल पर आरोप है कि उन्होंने ‘जेब गरमÓ न होने के कारण एक परिवार की जायज वरासत को अपनी विवादित रिपोर्ट की स्याही से काला कर दिया है। अब सवाल यह उठता है कि क्या अब वरासत दर्ज कराने के लिए वंशावली से ज्यादा ‘वजनदार जेबÓ की जरूरत है? बिना किसी ठोस आधार के रिपोर्ट को उलझा देना सीधे तौर पर पद का दुरुपयोग और आम जनता का मानसिक उत्पीड़न है।

परिजनों के अनुसार, सभी आवश्यक दस्तावेज और प्रमाण प्रस्तुत करने के बावजूद रिपोर्ट में विवादित दर्ज कर दी गई। इससे राजस्व अभिलेखों में नाम दर्ज होने की प्रक्रिया बाधित हो गई है और परिवार को आर्थिक व मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पीड़ित परिवार ने उच्चाधिकारियों से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर संबंधित लेखपाल के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी अन्य व्यक्ति को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अगर समय से सुविधा शुल्क दे दिया जाये, गलत काम को भी सही कर दिया जाता है। उत्तराधिकारी निखलेश बिन्द ने बताया कि उनके पिताजी कन्हई बिन्द ने इसके पूर्व बहुत सी जमीने बेची और उसका तरमीन भी कर दिया गया। तब कोई विवाद सामने नहीं आया और आज वरासत में लेखपाल साहब की मंशा पूरी नहीं हुई तो उन्होने विवाद का रिपोर्ट लगाकर हम लोगों को परेशान कर दिया है।

प्रशासनिक निष्पक्षता पर उठे सवाल

ग्रामीणों का आरोप है कि बिना ठोस आधार के विवाद दर्शाया गया है। उनका कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच की जाती तो मामला आसानी से निस्तारित हो सकता था। अब उत्तराधिकारियों को बार-बार अधिकारियों के समक्ष उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देना पड़ रहा है। जबकि जिस जमीनों का मामला है वहाँ मौके पर वरासत के गरीब उत्तराधिकारी आवास बनवाकर रह रहें हैं, और कोई आपत्ति नहीं है। मामले में जब लेखपाल से संपर्क किया गया तो उन्होंने स्पष्ट जानकारी देने से इनकार करते हुए कहा कि विवादित है, लेकिन क्या विवाद है यह नहीं बता सके। ग्रामीणों का कहना है कि वरासत जैसे संवेदनशील मामलों में इस प्रकार की कथित मनमानी आमजन के विश्वास को कमजोर करती है।

सरकार की मंशा के विपरीत कार्य करने का आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि राज्य सरकार पारदर्शिता और भ्रष्टाचारमुक्त व्यवस्था की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर इस प्रकार की कार्यशैली सरकार की छवि को धूमिल करने का काम करती है। उनका आरोप है कि यदि सुविधा शुल्क के अभाव में रिपोर्ट प्रभावित की जा रही है तो यह सीधे-सीधे शासन की मंशा के विपरीत आचरण है।

दस्तावेज सही, फिर भी रिपोर्ट में ‘खोट क्यों?

पीड़ित परिवार का आरोप है कि उन्होंने उत्तराधिकार के सभी कानूनी दस्तावेज और साक्ष्य पेश किए थे। लेकिन लेखपाल ने कलम की ताकत का गलत इस्तेमाल करते हुए मामले को विवादित श्रेणी में डाल दिया।

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