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शतचंडी महायज्ञ व कथा के अंतिम दिन लंका दहन और रावण वध का हुआ वर्णन

जौनपुर धारा, जौनपुर। बदलापुर विकास खंड के मेढ़ा गॉव में स्थित द्वारिका जूनियर हाईस्कूल के प्रांगण में चल रहे पांच दिवसीय शतचंडी महायज्ञ एवं कथा के अंतिम दिन गुरुवार को कथावाचक वाराणसी के वृजभूषण शरण सरस्वती महाराज ने अपने मुखार बिंदुओं से लंका दहन और रावण वध की कथा का वर्णन किया। उन्होंने प्रसंग सुनाते हुए बताया कि पंचवटी में भगवान श्री राम, लक्ष्मण और जानकी कुटिया में रहने लगते हैं। राम, सीता को नर लीला करने के लिए कहते हैं। सीता को अग्नि देव शिक्षा प्रदान करते हैं। इसी दौरान पंचवटी में शूर्पणखा आती है। वह सुंदर बन कर भगवान राम के आगे शादी का प्रस्ताव रखती है। राम उनको कहते हैं कि वह विवाहित हैं तथा उनका भाई लक्ष्मण अभी तक अविवाहित है। इसके बाद शूर्पणखा उससे विवाह का निवेदन करती है। शूर्पणखा के बार-बार जिद करने पर वह नहीं मानते। इसी दौरान शूर्पणखा अपने कुरुप रूप में आकर सीता को मारने की धमकी देती है। इस पर क्रोधित होकर लक्ष्मण उसकी नाक काट देते हैं। इसके बाद शूर्पणखा खरदूषण, त्रिसरा के पास जाती है। वे राम से युद्घ करते हैं। भगवान सभी निशाचरों का अंत कर देते हैं। इसके बाद शूर्पणखा रावण को इस युद्ध के बारे में बताती है। तब रावण क्रोध में आकर कहता है कि प्रभु का अवतार हो गया, अब मैं उनसे बैर पैदा कर सीता का हरण करूंगा। रावण मरीच की सहायता से सीता का हरण कर लेता है। कथा का श्रवण कराया जहां पूरा इलाका भक्ति मय हो गया। वहीं विद्यालय के बड़ेबाबू मदन सिंह की अध्यक्षता मे पांच दिवसीय शत चंडी महायज्ञ एवं कथा का आयोजन किया गया था जिसका शुक्रवार को हवन एवं विशाल भंडारे के साथ समापन होगा। उक्त कार्यक्रम सार्वभौम विश्व गुरू स्वामी करुणानंद सरस्वती महाराज उर्फ करिया बाबा के सानिध्य मे किया गया।

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