- गौशाला की दुर्दशा की खबर छापने पर चार पत्रकारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की है शिकायत
- 21 मार्च को पत्रकारों ने न्यूज कवर किया 24 मार्च को तहसील प्रशासन के इशारे पर करा दिया गया मुकदमा
जौनपुर धारा, केराकत। गौशाला में गायों के तड़प तड़प कर मरने की खबर छापने और दिखाने पर पत्रकारों के खिलाफ दर्ज कराए गए मुकदमें से भारतीय प्रेस परिषद हैरान है। प्रेस परिषद के सचिव नंगसंगलेम्बा आओ ने इसे प्रेस की स्वतंत्रता में कटौती मानते हुए अपनी चिंता जताई है। उसने दो सप्ताह के भीतर प्रदेश के मुख्य सचिव, गृह सचिव सहित पुलिस महानिरीक्षक, जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को जवाब के लिए नोटिस जारी किया है। प्रेस परिषद की नोटिस से प्रशासन में हड़कंप मच गया है। विदित हो कि 21 मार्च को स्वतंत्र पत्रकार आदर्श मिश्रा सहित तहसील क्षेत्र के चार पत्रकार पंकज कुमार सिंह, विनोद कुमार और अरविन्द कुमार यादव मु़फ्तीगंज ब्लॉक क्षेत्र के पेसारा गांव में स्थित अस्थाई गौशाला की दुर्दशा का न्यूज कवर करने गए थे। पत्रकारों के अनुसार गौशाला में दो गायें मरी पड़ी थीं और इतनी ही मरणासन्न थीं। उन्हें कौवे नोच रहे थे। गौशाला में गायों के बीच गोबर की मोटी परत जमी पड़ी थी। उन्होंने मौके का फोटो लिया और वीडियो बनाया तथा वहीं से एसडीएम नेहा मिश्रा को गौशाला की स्थिति से अवगत कराया और उनका पक्ष भी जाना। पत्रकारों के अनुसार एसडीएम का जवाब तल्ख था। बहरहाल पत्रकारों ने अपने अपने अखबारों में न्यूज छापा और सोशल मीडिया पर भी वायरल किया। न्यूज छपने के तीन दिन बाद 24 मार्च को तहसील के जिम्मेदार अधिकारियों ने गांव की ग्राम प्रधान चंदा देवी पर दबाव बनाकर चारों पत्रकारों के खिलाफ केराकत थाने में एससीएसटी एक्ट की धारा 3 (2) व आईपीसी की धारा 504, 506, 384 और 429 के तहत मुकदमा दर्ज करवा दिया। पत्रकारों को भयभीत करने और उन्हें दबाने की भावना से दर्ज कराए गए मुकदमे को लेकर ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के तहसील अध्यक्ष संजय शुक्ल के नेतृत्व में पत्रकारों ने अपना रोष व्यक्त किया और भारतीय प्रेस परिषद सहित उच्च अधिकारियों से इसकी शिकायत की। जिसके चलते भारतीय प्रेस परिषद ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव, गृह सचिव समेत जिले के डीएम और एसपी को जवाब देने की नोटिस भेज दी।



