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Homeअपना जौनपुरबिल रिवाइज में करोड़ो के घोटाले की आशंका

बिल रिवाइज में करोड़ो के घोटाले की आशंका

  • तीन संशोधनों में 4.76 से अधिक का झोलझाल बना जाँच का विषय
  • सही उपभोक्ताओं का जनसुनवाई पोर्टल से भी नहीं हो पाता निस्तारण

जौनपुर धारा,जौनपुर। जनपद जौनपुर में बिजली बिलों के संशोधन की आड़ में करोड़ों रुपये का घोटाला होने की आशंका है। जिले के सभी डिवीजनों में बिलिंग रिवाइज घोटाले की जांच कराई जाए तो बड़ा खुलासा हो सकता है। नगर क्षेत्र के तीन बिलों का मामला प्रकाश में आया है। हालाकि विभाग के उच्चाधिकारियों ने मामले को संज्ञान लेकर जाँच की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

बिल रिवाइज घोटाले में कार्यालय के कुछ अधिकारियों सहित कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध माना जा रहा है। बिलों को संशोधित कराने का खेल सालों से चल रहा है। बिलों की वसूली और जमाबंदी के दौरान प्रति बिल लाखों रूपये तक का वारा न्यारा हो जाता है। बिल रिवाइज करने के नाम पर अभी सिर्फ तीन प्रकरण सामने आया है, जिसमें खाता संख्या 6168842000 बिल का संशोधन दिनांक 29 दिसम्बर 2022 में किया गया। जिसका रिविजन करने से पहले 70,534.77 रूपये था और बाद में यह अमाउण्ट 13,012.06 में परिवर्तित कर दिया गया। इसी क्रम में खाता संख्या 5347466000 का बिल 322,137.42 रूपये से दिनांक 17 फरवरी 2023 को घटकर सीधे 120,149.74 रूपये हो गया तथा खाता संख्या 7427505237 का बिल दिनांक 31 मार्च 2023 को 236,190.34 से घटकर 19,571.50 हो गया। इन बिलों में किन कारणों से संशोधन किया गया है यह तो जाँच का विषय है। लेकिन इन्ही बिल संशोधनों की बात की जाये तो लगभग 476,123.23 रूपयों का मामला उजागर हो रहा है। इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तो और पता नहीं कितने अरब का मामला सामने आ सकता है। इस तरह पूरे जनपद भर में बिल रिवाइज करने के नाम पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की आशंका है। जिन बकाएदारों के बिल कम किए गये है, उनमें से 3 लोगों की सूची लीक होने से मामला खुला। फिलहाल यह भी अंदाजा लगाया जा रहा है कि सूची लीक होने के उपरान्त किसी अभियंता के पास इस बात का जवाब नहीं होगा कि बिल किस आधार पर कम हुए। जिनका बिल वास्तव में गड़बड़ बन जाता है उसके निस्तारण में उपभोक्ता को नाकों चने चबाना पड़ता है उसके बाद भी कोई लाभ नहीं होता। क्योकिं उन मामलों ऊपरी कमाई का कोई आसरा नहीं रहता है। फिर चाहे उपभोक्ता आईजीआरएस पोर्टल पर ही शिकायत क्यों न कर दे। इस मामले विभाग के उच्चाधिकारियों से बात की गई तो मालूम हुआ कि कुछ बिलों का ब्योरा मांगा गया है। जाँच कराई जायेगी और दोषी पाये जाने पर जिम्मदारों पर कार्यवाही की जायेगी।

मामला संज्ञान में आया है बिल संशोधन की सूची मांगी गई है। बाकी कमेटी बनाकर जाँच भी कराया जायेगा और दोषी पाये जाने पर बक्शा नहीं जायेगा। फिर चाहे वह जिस स्तर का अधिकारी हो।

चीफ इंजीनियर-वाराणसी जोन

  • आईजीआरएस शिकायतों का बिना जाँच ही हो जाता है निस्तारण

जन सुनवाई पोर्टल से हो रहे शिकायतों पर कार्यवाही करने के बजाय बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारी ऑफिस में बैठकर ही निस्तारण कर देते है और उपभोक्ता को तब पता चलता है जब उनके मोबाइल पर मामलों के निस्तारण की सूचना एसएमएस के माध्यम से पहँुचती है। मामला कोतवाली फीडर क्षेत्र का बताया जा रहा है। विगत दिनों मीरा सेठ के नाम से संचालित हो रहे कनेक्शन में गलत बिल बन जाने की शिकायत आईजीआरएस पर की गई थी। उपभोक्ता द्वारा खाता संख्या 5543942000 के बकाया बिल का भुगतान प्रतिमाह समय से कर दिया जाता रहा है। जिसका बिल यूनिट के अनुसार 9 सौ से 14 सौ के मध्य आता था लेकिन मार्च माह की बिल अचानक से 7206 रूपये आ गया। जिसकी शिकायत बिल सुधार होने की नियत से आईजीआरएस पर की गई। लेकिन उसका परिणाम यह रहा कि बिना किसी अधिकारी के मौका मुआयना किये मामले का कागजी निस्तारण कर दिया गया। इसकी सूचना उपभोक्ता को मोबाइल पर निस्तारण का मैसेज आने के बाद हुर्आ। जबकि निस्तारण के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है। जिससे यह सिद्ध होता है कि विभाग कितना जिम्मेदार है। बड़े-बड़े बिलों का तो झट से संशोधन कर दिया जाता है। लेकिन असल बिल सुधार में कोई फायदा न होने के कारण कम रूची ली जाती है।

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