बक्सा। 122दिवसीय जनजागरण यात्रा के 103वें पड़ाव पर ग्राम कलिंजरा में सत्संग सन्देश के दौरान पंकज महाराज ने कहा कि यह काल माया का देश है। यह शरीर आपका काल का पिंजरा है। माया ने काम, क्रोध, लोभ, मोह का बाजार लगा रखा है और इस शरीर के अन्दर विराजमान प्रभु के अंश, जीव के साथ अपने विशेष दूत मन, चित्त, बुद्धि व अहंकार को लगा रखा है। प्रमाण भी है ‘भूमि परत भा ढाबर पानी, जिमि जीवहिं माया लपटानीÓ मन बड़ा बलशाली है, मन शैतान है, मन धोखेबाज है, मन ही आत्मा का सबसे बड़ा दुश्मन है। राधास्वामी दयाल महाराज ने कहा ‘बड़ा बैरी ये मन घट में, इसी का जीतना कठिना, पड़ो तुम इस ही के पीछे और सब ही जतन तजनाÓ अन्य महात्माओं ने भी कहा है कि मन के मते न चालिये, मन के मते अनेक, मन पर जो असवार हो, सोइ साधू कोई एकÓ इसलिये मन ही हमको प्रभु के भजन-भक्ति से भी दूर करता है। मन को समझाकर, एकाग्र करके जब आप सुरत को शब्द से जोड़ने का अभ्यास करेंगे तो अन्तर में नाद सुनकर, वेदवाणी सुनकर आप का ये मन आनन्द लेने लगेगा, इसी आनन्द की खोज में मन सुबह से शाम तक माया के बाजार के चक्कर लगाता रहता है। आप साधू मत बनना, घर परिवार में रहकर चौबीस घण्टे में से घण्टा दो घण्टा समय निकाल कर भगवान का सच्चा भजन इस मनुष्य मन्दिर में कर लें। इस अवसर पर ऋषिदेव श्रीवास्तव, महेन्द्र बिन्द, रविशंकर चौहान, हरिप्रसाद, लक्ष्मी प्रसाद यादव, सहयोगी संगत उन्नाव से डॉ.सहदेव आदि उपस्थित रहे।
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