बलिया: रामलला के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के अवसर पर अयोध्या समेत देशभर में जो भक्ति की बहार आई है वो अकथनीय है. भव्य राम मंदिर में भगवान राम के विराजमान होने से पहले भगवान रामलला की नगरी में प्राण प्रतिष्ठा को लेकर मंदिर ट्रस्ट ने आमंत्रण पत्र बांटने का भी सिलसिला शुरू कर दिया है. जिसमें 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा के मौके पर शामिल होने के लिए निवेदन किया गया है. इसी कड़ी में बलिया जिले के पंडित विजय नारायण शरण को ट्रस्ट के द्वारा व्यक्तिगत रूप से निमंत्रण दिया गया है. पं. विजय नारायण शरण ने बताया कि यह वो घड़ी है जिसका वर्षों से इंतजार था. इस खुशी के पल को शब्दों में बयां कर पाना असंभव है. इसके लिए न जाने हमारे कितने पूर्वजों ने प्राणों की आहुति दे दी. हम बड़े सौभाग्यशाली हैं कि सबके दिलों में निवास करने वाले रामलला के प्राण प्रतिष्ठा में प्रतिभाग करने का अवसर मिला है.
महामंत्री चंपत राय ने दिया व्यक्तिगत निमंत्रण
पं. विजय नारायण शरण ने बताया कि राम जन्मभूमि का आंदोलन जब से चला तब से किसी न किसी रूप में जुड़ा रहा. रामलाल के लिए अपने तरफ से या अन्य श्रद्धालुओं की तरफ से 10 रूपए से लेकर लाखों का दक्षिणा देने का प्रयास किय. शुरू से ही यह मन में अवधारणा थीं की अपने रामलला के प्राण प्रतिष्ठा में हम जाएंगे. सालों बाद यह अवसर मिला है. संजोगवश श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय जी के द्वारा मुझे व्यक्तिगत निमंत्रण प्राप्त हुआ है. इस अनंत खुशी की घड़ी को शब्दों में बयां कर पाना संभव नहीं है. यह वाणी से व्यक्त करने का विषय नहीं यह विषय अकथनीय और निर्वचनीय है.
इस बात से होता था कारसेवकों को दुख
पं. विजय नारायण शरण ने बताया कि हमारे पूर्वजों ने राम मंदिर के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी. हम सन 1985 से ही अयोध्या जा रहे हैं. बड़ा वेदना होती थी, दर्द होता था. उस ढांचे के अंदर हिंदू प्रतीकों और देवताओं को देखकर, लेकिन हम सब सेवक अति सौभाग्यशाली हैं . जो अपने जीवन काल में अपने रामलला के प्राण प्रतिष्ठा के भव्यतम रूप को देखेंगे. आंखों में ये आंसू दर्द का नहीं बल्कि रामलाल के प्रति अनन्त प्रेम का है.


