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पुलिस और वन दरोगा की मिलीभगत से सिकरारा क्षेत्र में हरे पेड़ों की धड़ल्ले से कटाई

  • शेर बहादुर यादव

जौनपुर। जनपद के सिकरारा और मड़ियाहूं विकासखण्ड क्षेत्र में वन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। सूत्रों का दावा है कि पुलिस और वन दरोगा की मिलीभगत से हरे-भरे पेड़ों की लगातार अवैध कटाई की जा रही है।

एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर्यावरण संरक्षण के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर वृक्षारोपण अभियान चला रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सिकरारा क्षेत्र में सरकारी संरक्षण के चलते खुलेआम हरियाली उजाड़ी जा रही है। अब देखना यह है कि जौनपुर प्रशासन और पुलिस मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों का पालन करते हुए इस अवैध कटाई पर लगाम लगाते हैं या फिर वन माफियाओं का यह खेल इसी तरह चलता रहेगा।

शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं

स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार पुलिस और वन विभाग को शिकायतें देने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ग्रामीणों का कहना है कि वन माफियाओं को प्रशासन के भीतर से ही सहयोग मिल रहा है। यहां तक कि अवैध कटाई के पीछे सिकरारा पुलिस का संरक्षण और आर्थिक लेन-देन होने की भी चर्चा है।

आरा मशीनों पर हरी लकड़ियों का अंबार

क्षेत्र के कई आरा मशीनों पर हरी लकड़ियों के ढेर साफ नजर आते हैं। सवाल उठता है कि आखिर ये लकड़ियां कहां से आ रही हैं? ग्रामीणों का कहना है कि रात के अंधेरे में ट्रैक्टर और पिकअप से हरे पेड़ काटकर सीधे आरा मशीन तक पहुंचाए जाते हैं। आरोप तो यहां तक हैं कि इस प्रक्रिया को पुलिस खुद सुरक्षित रास्ता दिलाने का काम करती है ताकि कोई बड़ी अधिकारी की निगाह इस पर न पड़े।

वन विभाग की ढुलमुल नीति

वन विभाग के अधिकारियों से जब इस बारे में शिकायत की जाती है तो वे सिर्फ कार्रवाई की जाएगी, कहकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं। नतीजतन, हरे पेड़ों की कटाई लगातार जारी है और पर्यावरण संरक्षण की सरकारी योजनाएं ध्वस्त होती नजर आ रही हैं। सवालों के घेरे में प्रशासन जिले के डीएम और पुलिस अधीक्षक जहां पेड़ों के महत्व को लेकर जनजागरूकता रैलियां निकाल रहे हैं, वहीं जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। एक पेड़ मां के नाम जैसे अभियान भी वन माफियाओं के आगे बेअसर साबित हो रहे हैं।

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