चैत्र नवरात्रि का आज पहला दिन है. ऐसे में माता मंदिरों पर भक्तों की भारी भीड़ दिख रही है. दूरदराज से भक्त माता के मंदिर पर पहुंचकर अपनी अर्जी लगा रहे हैं. अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं. सिद्ध पीठ दुर्गन भवानी धाम का काफी प्राचीन इतिहास है. इस मंदिर में कई जिलों से पूजा अर्चना करने के लिए भक्त मां भवानी के दरबार पहुंचते हैं. शताब्दी वर्ष पूर्व यह मंदिर काफी प्राचीन है मंदिर में चैतऔर कुवांर नवरात्रि के साथ प्रत्येक सोमवार और शुक्रवार को यहां पर बड़ा मेला लगता है.
आपको बता देंगे गौरीगंज जिला मुख्यालय से 6 किलोमीटर दूर भवनशाहपुर स्थित दुर्गन भवानी धाम का काफी प्राचीन इतिहास है. इस मंदिर को राजा रणन्जयसिंह ने स्थापित करवाया था मंदिर में 9 पिंडी विराजमान है. साथ ही मां दुर्गा की दिव्य मूर्ति यहां पर खुदाई के दौरान मिली थी. इसके बाद राजा रणन्जय सिंह ने इस मंदिर की स्थापना कराई थी. मंदिर परिसर में ही सरोवर स्थापित है. और यहां का जल आंखों के लिए लाभकारी साबित होता है. इसके साथ ही दूरदराज से आने वाले भक्तों की मनोकामनाएं मां भवानी पूरी करती हैं. मंदिर में अमेठी जिले के साथ पड़ोसी जनपद सुल्तानपुर,प्रतापगढ़, रायबरेली,बाराबंकी के साथ दूर-दूर से भक्त यहां पर दर्शन करने के लिए मां भवानी के दरबार पहुंचते हैं. इसके साथ ही 9 दिनों तक मंदिर परिसर में हवन पूजन और पूजा-पाठ चलता है.इसके साथ ही सुबह शाम दिव्य आरती भी भवानी के दरबार में की जाती है. मंदिर परिसर में 9 दिनों तक बड़े मेले का भी आयोजन किया जाता है. मंदिर के वरिष्ठ पुजारी राजेंद्र महंत ने बताया कि इस मंदिर का काफी पुराना इतिहास है. मंदिर में दूरदराज से भक्त यहां पर आते हैं. मां भवानी के दरबार में भक्त दुख पीड़ालेकर आते हैं और खुशी खुशी वापस जाते हैं. मां भवानी सभी की मनोकामना पूरी करती हैं. पिंडी स्वरूप में यहां पर मां नौ रूपों में विराजमान हैं.



