जौनपुर। ऐतिहासिक शहर जौनपुर इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। नगर पालिका क्षेत्र के विभिन्न मोहल्लों में खुली नालियां और गहरे गड्ढे आम जनता के लिए काल बन चुके हैं। प्रशासन की घोर लापरवाही के कारण राहगीर और स्थानीय निवासी हर पल किसी अनहोनी के साए में जीने को मजबूर हैं। शहर के प्रमुख क्षेत्रों में जल निकासी की बदतर व्यवस्था और बिना ढक्कन के खुले मैनहोल हादसों को खुली दावत दे रहे हैं। फिलहाल, जौनपुर की जनता इन जानलेवा रास्तों से गुजरते समय अपनी जान जोखिम में डालने को मजबूर है। नगर पालिका को चाहिए कि वह कागजी दावों से हटकर धरातल पर मरम्मत का कार्य शुरू कराए ताकि शहरवासियों को सुरक्षित आवागमन मिल सके।
इन इलाकों में स्थिति है बेहद गंभीर
शहर के कई मोहल्ले ऐसे हैं जहाँ स्थिति बद से बदतर हो चुकी है। विशेष रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों में जनता में भारी रोष व्याप्त है।

रसीदाबाद : इस क्षेत्र में नालियों के ऊपर के स्लैब टूटे हुए हैं या गायब हैं। संकरी गलियों में कहीं छोटी तो कहीं बेहद चौड़ी नालियां खुली पड़ी हैं, जो बच्चों और बुजुर्गों के लिए सबसे बड़ा खतरा बनी हुई हैं।

सीलेख़ाना : यहाँ भी सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। खुले गड्ढों के कारण आए दिन लोग चोटिल हो रहे हैं। रात के अंधेरे में स्थिति और भी भयावह हो जाती है क्योंकि स्ट्रीट लाइटों का भी अभाव है।

अहियापुर रेलवे अंडरपास के समीप : रेलवे अंडरपास के पास जलजमाव और खुली नालियों की समस्या विकराल है। यहाँ न केवल पैदल चलने वालों को परेशानी होती है, बल्कि अंडरपास से गुजरने वाले वाहन भी अक्सर इन गड्ढों में फंस जाते हैं।
दोपहिया वाहन चालकों के लिए जानलेवा सफर
सड़कों के किनारे और बीचों-बीच खुली ये छोटी-बड़ी नालियां सबसे ज्यादा मोटरसाइकिल और स्कूटी सवारों के लिए मुसीबत बनी हुई हैं। अक्सर संतुलन बिगड़ने या सामने से आ रहे वाहन को रास्ता देने के चक्कर में दोपहिया वाहन चालक इन नालियों में गिर जाते हैं। कई बार लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं और उनके वाहनों को भी भारी नुकसान पहुँच रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ‘सड़क पर चलते समय हमेशा डर बना रहता है कि कहीं पहिया किसी खुले गड्ढे में न चला जाए। ‘
प्रशासन की चुप्पी और जनता की मांग
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि नगर पालिका द्वारा समय-समय पर सफाई के नाम पर नालियों के ढक्कन हटा तो दिए जाते हैं, लेकिन उन्हें दोबारा ढकना प्रशासन भूल जाता है। लोगों का तीखा सवाल है कि ‘क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा? ‘



