जौनपुर धारा, जौनपुर। सिविल कोर्ट में मंगलवार को अटाला मस्जिद के पैमाइश मामले पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने कहा पैमाइश की तारीख और प्रारूप अगली सुनवाई 16 दिसंबर को तय होगा। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि हम हाईकोर्ट गए हैं। हाईकोर्ट में मामला सुनने के बाद ही कोई कार्रवाई की जाए। हिन्दू पक्ष की ओर से दावा किया गया है कि अटाला मस्जिद असल में अटाला देवी मंदिर है। कोर्ट में याचिका दायर कर मस्जिद को मंदिर बताते हुए पूजा-अर्चना करने का अधिकार मांगा गया है। हिन्दू पक्ष के वकील राम सिंह ने कहा कोर्ट ने 2 जुलाई को पैमाइश का आदेश दिया था। सिविल जज जूनियर डिवीजन की कोर्ट में सुरक्षा बल उपलब्ध कराकर पैमाइश कराने के लिए एप्लिकेशन दी गई थी। इसी मामले पर आज सुनवाई हुई। मंदिर की दीवारों पर मिली थीं कमल के फूलों और बैलों की आकृतियां, जैसे मंदिरों में होती हैं। हिंदू पक्ष ने स्वराज वाहिनी एसोसिएशन (एसवीए) के प्रतिनिधि संतोष कुमार मिश्रा के माध्यम से जौनपुर की सिविल कोर्ट में याचिका दायर किया था। इसमें 14वीं शताब्दी की संपत्ति को ‘अटाला देवी मंदिर’ घोषित करने और सनातन धर्म के अनुयायियों को वहां पूजा-अर्चना का अधिकार देने की मांग की। संतोष कुमार मिश्रा की याचिका को स्थानीय अदालत और जिला अदालत ने सुनवाई योग्य माना। मस्जिद कमेटी ने स्थानीय अदालत के मई 2024 के इस आदेश को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। हिंदू पक्ष का कहना है कि यह संपत्ति मूल रूप से 13वीं शताब्दी में राजा विजय चंद्र द्वारा निर्मित ‘अटाला देवी मंदिर’थी। मस्जिद कमेटी का कहना है कि हिंदू पक्ष का मुकदमा कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण है। दावा है कि एसवीए सोसायटी के नियम उन्हें इस प्रकार के मामले में शामिल होने की अनुमति नहीं देते, साथ ही, सम्पत्ति हमेशा से मस्जिद के रूप में उपयोग में रही है और 1398 में इसके निर्माण के बाद से मुस्लिम समुदाय वहां नियमित रूप से नमाज अदा करता आ रहा है। एएसआई के पहले महानिदेशक अलेक्जेंडर कनिंघम ने अपनी रिपोर्ट में अटाला मस्जिद को अटाला देवी म्ांदिर के रूप में पहचानने की बात कही थी। एएसआई के पहले महानिदेशक अलेक्जेंडर कनिंघम ने अपनी रिपोर्ट में अटाला मस्जिद को अटाला देवी मंदिर के रूप में पहचानने की बात कही थी। वहीं, कोलकाता स्कूल ऑफ आर्ट के प्रिंसिपल ईवी हेवेल ने अपनी पुस्तक में अटाला मस्जिद की प्रकृति और चरित्र को हिन्दू बताया था। साल 1865 के एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल के जनरल में अटाला मस्जिद के भवन पर कलश की आकृतियों का होना बताया गया है। वकील ने कहा, एएसआई की रिपोर्ट में अटाला माता मंदिर की तस्वीरों में शंख, त्रिशूल, पटदल कमल, गुड़हल के फूल और बंधन बार जैसे प्रतीक स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। जो हिंदू शिल्पकला का हिस्सा है। वहीं, अटाला मस्जिद की भूमि राजस्व अभिलेखों में जामा मस्जिद के नाम पर दर्ज है।
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Jaunpur News : 16 दिसम्बर को तय होगी पैमाइश की तारीख



