चित्रकूट. बुंदेलखंड के सबसे पिछड़े चित्रकूट जिले के पाठा क्षेत्र के सैकड़ों गांवों को पेयजल संकट से निजात दिलाने के लिए 1973 में ‘पाठा जल कल’ योजना की आधार शिला रखी गई थी. जबकि इसका शुभारंभ देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 9 जनवरी 1974 को किया गया था. इसके बाद से ठा तक पाठा पेयजल योजना चित्रकूट के लोगों की प्यास बुझाती आ रही है. वहीं, एक बार फिर चित्रकूट में पारा चढ़ने लगा है, तो इस योजना के कर्मचारी तैयारियों में जुट गए हैं. पाठा पेयजल योजना के तहत चित्रकूट के ग्रामीण इलाकों में टैंकरों के माध्यम से पानी पहुंचाया जाता है. दरअसल जिस इलाके में पानी की किल्लत आ जाती है. उस इलाके में पाठा पेयजल से टैंकर भेजे जाते हैं. चित्रकूट के लगभग 200 से ज्यादा गांवों के लोगों तक पानी पहुंचाया जाता है.
पानी की किल्लत के बीच वरदान बनी योजना
सबसे बड़ी बात यह है कि बुंदेलखंड के चित्रकूट में गर्मियां आते ही पानी की किल्लत काफी देखने को मिलने लगती है. गर्मियों के मौसम में पोखर, तालाबों, हैंडपंप और कुआं से पानी गायब हो जाता है. ऐसे हालात में पाठा पेयजल लोगों की प्यास बुझाने का काम करती है. वहीं, चित्रकूट में गर्मियां शुरू होने लगी हैं और पाठा पेयजल के कर्मचारी अपनी तैयारियों में जुटे हुए हैं. जैसे-जैसे गर्मी बढ़ेगी और प्रशासन के तरफ से इनको आदेश मिलेगा. यह लोग ग्रामीण इलाकों में पानी पहुंचाने का काम शुरू कर देंगे. बता दें कि पाठा पेयजल योजना चित्रकूट के लोगों के लिए खास योजना मानी जाती है. 1974 से यह योजना बुंदेलखंड के लोगों की प्यास बुझाने के लिए वरदान साबित हो रही है.



