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Homeअपना जौनपुरहादसों का सबब बन रहें डग्गामार अनफिट वाहन

हादसों का सबब बन रहें डग्गामार अनफिट वाहन

  • धुआं उगलने वाला वाहन भी हो जातें है प्रदूषण मुक्त
  • रोडवेज बस की रंगाई कराकर यात्रियों को गुमराह करतें है डग्गामार वाहन
  • सरकारी राजस्व को दबंगई के बल पर चुना लगा रहे प्राइवेट बस संचालक

जौनपुर धारा, जौनपुर। नगर के रोडवेज बस स्टैंड अब प्राइवेट वाहनों के खड़ा करके सवारी भरने का स्थान बन गया है। एक सरकारी बस के चारों तरफ प्राइवेट बसों के खड़े रहने से रोडवेज बस चालकों को आने जाने में दिक्कत होती है, और सवारियों को भी काफी बुरी परिस्थियों से होकर गुजरना पड़ता हैं। डग्गामार वाहनों की सक्रियता एक बार फिर बढ़ गई है, अनधिकृत प्राइवेट वाहनों को रोडवेज बसों के कलर में रंगकर चलाया जा रहा है। इसकी वजह से डग्गामार बसों और रोडवेज बसों में फर्क नहीं नजर आ रहा। डग्गामार वाहन चालक बस स्टेशन परिसर के आसपास से जबरिया सवारियों को बैठा रहे हैं। इससे परिवहन निगम के राजस्व में नुकसान हो रहा है।

बतातें चलें कि सुबह के समय तो रोडवेज बस स्टैण्ड के बाहर ही डग्गामारी करने वाले छोटे-बड़े वाहन चालक परिसर में घुसकर सवारिया उठाने का प्रयास करतीं है और मना करने पर विवाद की स्थिति बन जाती है। वे रोडवेज बस स्टैंड के अंदर घुसकर सवारी बैठातें हैं या जबरदस्ती अपने वाहनों में ले जाकर बैठाते हैं। कुछ रोडवेज कर्मी डर के मारे विरोध नहीं करते हैं तो कुछ उनके साथ संलिप्त रहते हैं। प्राइवेट बसें रोडवेज परिसर से कुछ ही दूरी पर जेसिज चौराहे पर अवैध रूप से सड़क पर खड़ा कर वाराणसी, प्रयागराज, आजमगढ़ सहित अन्य यात्रियों को बैठाते हैं। प्राइवेट बसों के संचालन से परिवहन निगम के राजस्व को क्षति पहुंच रही है। इसके अलावा जेसिज चौराहे पर बने पुलिस बूथ के दोनों ओर प्राइवेट रिक्शा भी बीच सड़क से ही सवारियां भरतीं रहतीं हैं। जिनके चलते कभी-कभी सड़क पर जाम की स्थिति बन जाती है। यह हाल तब है जब शहर में प्राइवेट बसों कि लिये अलग से स्टैण्ड बनाये गये हैं। ऐसा भी नहीं है कि इस बात की जानकारी परिवहन निगम प्रशासन को नहीं है। सब कुछ जानने के बाद भी वे कार्रवाई करने से कतरातें हैं। ओवरलोड वाहनों से आए दिन हादसे होते हैं, लेकिन फिर भी इनपर कोई अंकुश नहीं लग पा रहा है। कई वाहन दिनभर सड$कों पर क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाकर फर्राटे भर रहे हैं, जिनमें ट्रैक्टर, पिकअप, मेटाडोर, ट्रक आदि वाहन भी ओवरलोडिंग कर सड$कों पर दौड़ते देखे जा सकते हैं। बावजूद इसके न तो परिवहन विभाग सक्रिय दिख रहा है और न ही पुलिस।

रोडवेज से 500मीटर में प्राइवेट बस स्टैण्ड पर है रोक

नियमानुसार रोडवेज बस स्टैंड से 500मीटर के दायरे में कोई भी प्राइवेट वाहन स्टैंड नहीं होना चाहिए। यदि कोई वाहन स्टैंड संचालित होता है तो उनके खिलाफ जिला प्रशासन, पुलिस और परिवहन निगम को सख्ती से कार्रवाई करनी चाहिए लेकिन यहां परिस्थितियां बिल्कुल वितरीत है। रोडवेज बस स्टैंड के पांच सौ मीटर के दायरे अवैध स्टैण्ड संचालित हो रहें हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई कोई कार्रवाई न होने से उनके हौसले और भी बुलंद होते जा रहें हैं। पर्यवेक्षण कार्य से जुड़े कर्मचारियों और बिचौलियों के बीच परिसर से सवारी ले जाने को लेकर कई बार हाथापाई हो चुकी है। फिर भी उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

पढ़ाते हैं सुरक्षा का पाठ, खुद नहीं करते अमल

यातायात सुरक्षा को लेकर पुलिस व परिवहन विभाग द्वारा लोगों को सड$क सुरक्षा का पाठ पढ़ाया जाता है। विभाग की टीमें समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन कर लोगों को तेज गति से वाहन न चलाने व क्षमता से अधिक भार लेकर न चलने की हिदायत देते हैं। लेकिन यातायात के कर्ता-धर्ता खुद इन बातों पर अमल नहीं करते। अगर करते तो मौत के दूत बने ये ओवरलोडिंग वाहनों का आवागमन कब का बंद हो गया होता। जिस तरह से ओवरलोड वाहन सड$कों पर दौड़ रहे हैं उससे साफ पता चलता है कि विभाग पूरी तरह से सक्रिय नहीं है। नियम है कि कोई भी भार वाहक वाहन में क्षमता से अधिक भार नहीं लादा जाए, लेकिन इस नियम का शहर में पालन नहीं हो रहा है।

ओवरलोड वाहनों की नहीं होती जांच

जिम्मेदार बड़े-बड़े अधिकारी दोपहिया व चार पहिया वाहनों की चेकिंग का फरमान तो जारी करते हैं, लेकिन ओवरलोड वाहनों पर कोई निर्देश नहीं दिया जाता, जबकि नगर के प्रमुख मार्गों व चौराहो पर स्थित चौकी, पुलिस बूथ आदि की तरफ से वार्दीधारी पुलिस कर्मियों के सामने से ही प्रतिदिन ओवरलोड वाहन गुजरते हैं। जिन पर कोई कार्रवाई नहीं होती। वैसे तो यह मामले एआरटीओ प्रशासन के कार्यक्षेत्र में आतें है, लेकिन सड़क पर फर्राटा भर रहें इन वाहनों से साफ पता चलता है कि जिले का एआरटीओ विभाग कितना सक्रिय है।

वायु प्रदूषण में पुराने वाहनों का भी अहम रोल

शहर की हवा में अब प्रदूषण बढ़ता जा रहा है, सड़कों पर पुराने वाहनों से निकलने वाले धुएं की न तो जांच हो रही है और न ही जिम्मेदार विभाग इसे लेकर कोई दिलचस्पी दिखा रहे हैं। बीते दो सालों में इसके लिए किसी प्रकार की जांच अभियान भी नहीं चलाई गई है। खटारा सवारी वाहनों का धुआं हवा में घुलकर जानलेवा साबित हो रहा है। शहर में इन मापदंडों को भरपूर ख्याल रखा जाना चाहिए। परिवहन, ट्रैफिक व पर्यावरण विभागों को इसकी समय-समय पर मॉनिटरिंग भी करनी चाहिए। ट्रैफिक पुलिस द्वारा हाल ही में मनाए गए यातायात सप्ताह में भी वाहनों से निकलने वाले धुएं की जांच शहर में बिल्कुल नहीं की गई। प्रदूषण के सूक्ष्म कण हवा में घुले हुए हैं। इससे साबित होता है कि धुएं से सेहत पर विपरीत असर पड़ रहा है। हैरत की बात यह है कि वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण का ग्राफ कितना है और किन क्षेत्र में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है।

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