प्राचीन गौरी शंकर मंदिर चंदापुर में बह रही है भक्ति की रसधार
जौनपुर धारा, बदलापुर। स्थानीय क्षेत्र के प्राचीन गौरी शंकर मंदिर चंदापुर में भक्ति की रस धार बह रही है। दिन में मानस व भागवत कथा तो रात में रासलीला की मधुर झांकियों से लोग निहाल हो रहे हैं। शनिवार की रात वृंदावन से आए कलाकारों ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की जीवंत प्रस्तुति कर भक्ति रस की ऐसी त्रिवेणी बहाई कि श्रोता डूबते-उतराते रहे। मथुरा के राजा को आकाशवाणी से सुनाई पड़ी कि तुम्हारा काल गोकुल में पैदा हो चुका है। यह सुन उसके माथे पर चिंता की लकीरें खींच गईं। उसे पता था कि पूरा ब्रज मंडल चौरासी कोस में बसा है। ऐसे में यह पता लगाना कठिन था कि उसका काल किसके घर पैदा हुआ है। मंत्रियों ने सलाह दी कि एक साल तक के सभी बच्चों को मार दिया जाय। अंत में पूतना को कृष्ण भगवान को मारने हेतु भेजा गया। उल्टे प्रभु ने उसकी ही जीवन लीला समाप्त कर दी। लीला को आगे बढ़ाते हुए माखन चोरी, चंदा के लिए रूठना, मां यशोदा द्वारा मिट्टी खाने पर प्रभु को रस्सी से बांधने जैसी कई लीलाओं का कलाकारों ने जीवंत मंचन किया। रास लीला का निर्देशन स्वामी श्रीचंद शास्त्री ने किया। इस अवसर पर सुदाम कुटी कै महंत अमर दास जी, प्रेम दास जी, सुभाष चन्द्र तिवारी, उन्नत सिंह, गोविंद तिवारी, राजेंद्र सिंह, कमलेश यादव, बृजेश सिंह आदि रहे। आयोजक मंदिर के पुजारी दया शंकर दास त्यागी ने आगंतुकों के प्रति आभार ज्ञापित किया।



