जौनपुर। नाग पंचमी का पर्व मंगलवार को आस्था और विश्वास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर नाग देवता का पूजन कर दूध और धान का लावा चढ़ाया गया। घरों में पकवान बने, महिलाओं ने मेहदी लगायी और कई जगह पर मेलों का आयोजन कर कुष्ती दंगल का आयोजन किया गया। जहां पहलवानों ने अपने दांव पेच आजमाये। मंदिर प्रांगण में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। श्रद्धालु विशेष पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुंचे। उन्होंने देवाधिदेव महादेव की विधिवत पूजा की और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना की।

ज्ञात हो कि भारत कृषिप्रधान देश हैं सांप खेतों का रक्षण करता है, इसलिए उसे क्षेत्रपाल कहते हैं। जीव-जंतु, चूहे आदि जो फसल को नुकसान करने वाले तत्व हैं, उनका नाश करके सांप हमारे खेतों को हराभरा रखता है। साँप हमें कई मूक संदेश भी देता है। सांप सामान्यतया किसी को अकारण नहीं काटता। उसे परेशान करने वाले को या छेड़ने वालों को ही वह डंसता है। सांप भी प्रभु का सर्जन है, वह यदि नुकसान किए बिना सरलता से जाता हो, या निरुपद्रवी बनकर जीता हो तो उसे मारने का हमें कोई अधिकार नहीं है। जब हम उसके प्राण लेने का प्रयत्न करते हैं, तब अपने प्राण बचाने के लिए या अपना जीवन टिकाने के लिए यदि वह हमें डँस दे तो उसे दुष्ट कैसे कहा जा सकता है? हमारे प्राण लेने वालों के प्राण लेने का प्रयत्न क्या हम नहीं करते? साँप को सुगंध बहुत ही भाती है। चंपा के पौधे को लिपटकर वह रहता है या तो चंदन के वृक्ष पर वह निवास करता है। केवड़े के वन में भी वह फिरता रहता है। उसे सुगंध प्रिय लगती है, इसलिए भारतीय संस्कृति को वह प्रिय है। प्रत्येक मानव को जीवन में सद्गुणों की सुगंध आती है, सुविचारों की सुवास आती है, वह सुवास हमें प्रिय होनी चाहिए। वर्षों परिश्रम से संचित शक्ति यानी जहर वह किसी को यों ही काटकर व्यर्थ खो देना नहीं चाहता। हम भी जीवन में कुछ तप करेंगे तो उससे हमें भी शक्ति पैदा होगी। यह शक्ति किसी पर गुस्सा करने में, निर्बलों को हैरान करने में या अशक्तों को दु:ख देने में व्यर्थ न कर उस शक्ति को हमारा विकास करने में, दूसरे असमर्थों को समर्थ बनाने में, निर्बलों को सबल बनाने में खर्च करें, यही अपेक्षित है। इन दौरान हनुमान घाट से बोल बम कांवरिया संघ के बैनर तले श्रद्घालुओं ने दंडवत करते हुए जानेश्वर मंदिर में पहुंचे और भोलेनाथ का जलाभिषेक की किया। इसी क्रम में परम्परा के अनुसार राजा साहब के पोखर के पास कुश्ती प्रतियोता का भी आयोनज किया गया।
मन्दिरों में उमड़ा आस्था का शैलाब

प्राचीन गोमतेश्वर मंदिर पर नाग पंचमी के पावन अवसर पर ग्रामीणों ने प्राचीन गोमतेश्वर महादेव मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की। सुबह मंदिर का कपाट खुलते ही ग्रामीण शिवलिंग पर दूध और लावा का जल अभिषेक करने पहुंचे। भक्तों ने इस अवसर पर भगवान से आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने प्रार्थना की कि सभी लोगों को खुशहाल और समृद्धिशाली रखें। ग्रामीणों ने अपनी मनोकामनाओं की सिद्धि के लिए भी प्रार्थना की। नाग पंचमी हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण त्योहार है। इस दिन भगवान शिव और नाग देवता की पूजा का विशेष महत्व है। परंपरा के अनुसार, इस दिन शिवलिंग पर दूध और जल चढ़ाने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
भक्तों ने की नाग देवता की पूजा, पिलाया दूध

नागपंचमी पर्व पर में शिव भक्तों का उत्साह देर रात से ही शहर के शिवालयों में देखने को मिला। मंदिर में महादेव के दर्शन और नाग देवता के पूजन करने के लिए बड़ी संख्या में पहुंचे रहे हैं। महादेव के भक्त लंबी-लंबी कतार में लगकर महादेव का वंदन करते रहे हैं। मंदिरों में नागपंचमी के अवसर पर बाबा का विशेष शृंगार किया गया है। वहीं, शाम को नागपंचमी के अवसर पर दंगल का आयोजन शहर के कई अखाड़ों में किया जाएगा। भक्तों ने डमरू और शंख ध्वनि के बीच भोले बाबा का शृंगार कर पूजन अर्चन किया। हर-हर महादेव और बोल-बम के जयकारों के बीच मंगला आरती की शुरुआत हुई। इस दौरान सपेरों ने क्षेत्र में लोगों को नाग देवता के दर्शन कराया और लोगों को धूप भी पिलाया।
सपेरों ने कराया नाग देवता के दर्शन

नागपंचमी के अवसर पर गांव में कुश्ती प्रतियोगिता आयोजित की गयी है। इस दौरान कहीं-कहीं कबड्डी प्रतियोगिता भी करायी गई है। शहर में दुकान-दुकान सपेरे सांप दिखा कर लोगों को नाग देवता के दर्शन कराते रहें। जिसमें काफी संख्या में बच्चे व बड़े हिस्सा ले रहे है। नागपंचमी के दिन हल्की बारिश ने लोगों को काफी राहत दिया।



