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E-Paper 04-04-2026

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फर्जी निस्तारण के कारण दम तोड़ रही आईजीआरएस पोर्टल

  • अधिकारियों की मनमानी से सरकार की मंशा पर लग रहा सेंध
  • जन सुनवाई निस्तारण मामलों में पहले भी फिसड्डी रहा है जौनपुर

जौनपुर धारा, जौनपुर। मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायतों के निस्तारण की हर माह जिले स्तर पर समीक्षा की जाती है, लेकिन निस्तारण की प्रक्रियाओं में सम्बन्धित अधिकारी झोल-झाल करते हुए फर्जी रिपोर्ट लगाकर योजना के महत्व को संदूक में बन्द करने का कार्य कर रहें है। इससे पूर्व भी आईजीआरएस के निस्तारण में जौनपुर पिछड़ा रहा है।इससे पूर्व जिलाधिकारी मनीष वर्मा ने बैठक कर फर्जी निस्तारणों पर लोगों से स्पष्टीकरण मांगा था।लेकिन स्थितियां आज भी जस की तस बनी हुई। आमजन की सुनवाई व त्वारित निस्तारण के लिए लागू पीएम हेल्पलाइन, सीएम पोर्टल आईजीआरएस का जिम्मेदार अधिकारी फर्जी रिपोर्टो के आधार पर निस्तारण कर योजना की दम तोड़ने का कार्य कर रहें है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आम जनता की शिकायतों का आसानी से निस्तारण कराने के लिए जनसुनवाई पोर्टल लांच कराया है। जिसमें दर्ज शिकायतों में बिना मौके पर जाए ही स्थलीय रिपोर्ट लगाई जा रही है। इससे आम नागरिकों को न्याय नहीं मिल पा रहा है और समस्या जस की तस बनी हुई है। मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायतों के निस्तारण की हर माह जिलाधिकारी समीक्षा करते है। गत माह हुई बैठक के दौरान शिकायतों के निस्तारण में हीलाहवाली व गलत रिपोर्ट पर कुछ अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया था। इसके बाद भी अधिकारियों की कार्यशैली में बदलाव नहीं आया है। अपनी लापरवाही के चलते अधिकारी संबंधित विभाग की पोल खोल रहे है। जांच अधिकारी मामलों में शिकायतकर्ता की रिपोर्ट लगाकर फर्जी तरीके से निपटारा कर दिया जा रहा है। जनसमस्याओं की शिकायत व उसके निस्तारण के लिए ऑनलाइन प्लेटफार्म सरकार की तरफ से शुरू किया गया है। जिसे लेकर शिकायतकर्ता परेशान हैं और अफसर शासन को शत-प्रतिशत निस्तारण की रिपोर्ट भेजकर मौज काट रहे हैं। शासन का मकसद लोगों को घर बैठे इंसाफ दिलाने का है। लेकिन जिले के अधिकारियों की मनमानी की वजह से सरकार की इस मंशा पर पानी फिरता नजर आ रहा है। बताया जाता है कि पोर्टल पर दर्ज होने वाले अधिकतर मामलों की जांच तक नहीं की जाती। अफसर दफ्तर में बैठे-बैठे निस्तारण की रिपोर्ट लगा देते हैं। शिकायतकर्ताओं के आरोपों को जांच के बिना ही उन्हें झूठा साबित कर दिया जाता है। इसे लेकर शिकायत दर्ज कराने वाले परेशान हैं। यही वजह है कि आम लोगों का विश्वास अब इस पोर्टल से उठता जा रहा है। सबसे अधिक फर्जी निस्तारण बिजली विभा का सामने आ रहा है।

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