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संघ का वर्ष प्रतिपदा उत्सव व पथ संचलन आयोजित

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Homeअपना जौनपुरनम आखों से दुर्गा माँ के प्रतिमाओं को दी गई अन्तिम विदाई

नम आखों से दुर्गा माँ के प्रतिमाओं को दी गई अन्तिम विदाई

  • शक्तिकुण्ड में विसर्जित हुई मूर्तियां, दूसरे दिन भी चलता रहा विसर्जन
  • झांकियों से सजी रहीं शोभायात्रा, गूंजायमान रहा समूचा जनपद

जौनपुर। विजयादशमी के अवसर पर दुर्गा प्रतिमाओं का विजर्सन सद्भावना पुल के समीप स्थित विसर्जन घाट पर बने शक्ति कुण्ड में संपन्न हुआ। गुरूवार को दोपहर बाद से ही ट्रैक्टरों की ट्रालियों पर मां की प्रतिमाओं की झॉकी बनाकर शोभायात्रा निकाली गयी। इस दौरान प्रतिमाओं के आने का क्रम अगले दिन तक चलता रहा। प्रतिमाओं के आगे पीछे श्रद्धालुओं की लम्बी कतारें अबीर-गुलाल उड़ाती हुयी चल रही थी। मां के जयकारे की गगनभेदी गूंज से वातावरण भक्तिमय हो चला। इस दौरान दोपहर से ही चलने वाला मेला असत्य पर सत्य की जीत का पर्व विजयादशमी हर्षोल्लास के साथ संपन्न हो गया।

राम-रावण युद्ध के बाद अहंकार रूपी रावण के विशालकाय पुतले में आग लगते ही राजा श्रीरामचंद्र के जयघोष से वातावरण गूंज उठा। जिलेभर में जगह-जगह ऐतिहासिक मेले का आयोजन किया गया। रविवार सुबह जिले की बड़ी महारानी के रूप में विख्यात गौशाला की मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन से पहले जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक व अन्य अधिकारियों ने अक्षत फूल देकर मां को अंतिम विदाई दिया। इस दौरान विसर्जन कुंड के साथ-साथ सद्भावना पुल से इस विहंगम अदृश्य को देखने के लिए लाखों की संख्या में लोग सुबह तक डटे रहे। दशहरा के उपरांत मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन गुरूवार से शुरू होकर लगातार दूसरे दिन शुक्रवार को भी जारी है। श्री दुर्गा पूजा महासमिति के तत्वाधान में लगभग 300 सौ प्रतिमाओं का विसर्जन नगर के सद्भावना पुल पर बनाए गए विसर्जन कुंड में किया गया।

शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक स्थापित प्रतिमाओं का विसर्जन प्रारम्भ किया गया, और एक के बाद एक पूजा पंडालों में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमाएं विसर्जित की गई। सद्भावना पुल के समीप शक्ति कुंड बनाकर दुर्गा प्रतिमाएं स्थापित की गई। प्रशासन की तरफ से विसर्जन व सद्भावना पुल के पूर्वी तरफ जेसीबी से खोदकर काफी विशालकाय शक्ति कुंड बनाया गया था। पुलिस विभाग ने भी प्रतिमा विजर्सन की तैयारियां पूरी कर ली थी। जिन-जिन रास्तों से प्रतिमाएं जा रही थी, उन-उन मार्गों से दुपहिया और चार पहिया वाहनों के आने पर रोक लगा दी गयी थी। इसी प्रकार ग्रामीणांचल में भी प्रतिमाओं का विसर्जन धूमधाम से किया गया। उधर पंडित जी रामलीला समिति के तत्वावधान में कालीजी मंदिर सब्जी मंडी से राम-रावण युद्ध करते हुए रथ निकला। यह रथ कोतवाली, अल्फस्टीनगंज, खासनपुर होते हुए राजा साहब के पोखरे पर पहुंचा। दशहरे के दिन ही भगवान राम ने लंका के राजा रावण का वध किया था। इसी की खुशी में दशमी तिथि को विजयादशमी को पर्व के रूप में मनाया जाता है। युद्ध में विजय के कारण और पांडवों से जुड़ी एक कथा की वजह से विजयदशमी को हथियार या शस्त्र पूजने की परंपरा भी है। मेले में कहीं कोई हादसा ना हो इसको लेकर जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन पूरी तरह से चौकन्ना रहा शहर कोतवाल मिथिलेश मिश्रा के नेतृत्व में पूरा शहर पुलिस का भ्रमण लगातार चला  रहा। जगह-जगह लंगरों पर भी लोगों को प्रसाद का वितरण किया जाता रहा। विभिन्न सामाजिक असुरक्षित संगठनों द्वारा मेले में आने जाने वालों को हलवा-पूड़ी, चाय व  अन्य प्रसाद का वितरण किया।

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