जौनपुर। हिन्दू सभा, सन्त महासभा एवं चित्रगुप्त भगवान अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि़ महाराज ने कहा है कि आज धार्मिक स्वाभिमान को बचाने की जरूरत है। सनातन परम्पराओं में व्यवधान डाला जा रहा है। इसका डटकर मुकाबला करना चाहिए तभी हिन्दू समाज के समाज के अस्तित्व की रक्षा हो सकती है। वह शीतला धाम चौकिया में तीन दिनी श्रृगांर महोत्सव का शुभारंभ करने के पश्चात शुक्रवार को नगर के रूहट्टा में स्थित चित्रगुप्त मन्दिर पर पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होने कहा कि अवसर महत्वपूर्ण है। बसन्त पंचमी है। स्वामी विवेकानन्द एवं नेताजी सुभाष चन्द बोस की जयन्ती भी है। उनका देश को बचाने में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। ऐसे अवसर पर देश के दोनो वीर सपूतों से प्रेरणा लेकर उनके आदर्श को जीवन में उतारना चाहिए। कुंभ मेला में खलल डाला जा रहा है। आस्थाओं पर चोट पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। गरीबों की सेवा और देश की सेवा में अपनी जान गंवाने वालों को मोक्ष मिलता है और वे अमर हो जाते हैं। कम्युनिस्टवादी हिन्दू पंरपराओं पर चोट पहुंचा रहे है। ऐसा त्रेता युग में भी हुआ था। ऋषियों के यज्ञ पूजन में व्यवधान डाला जाता था। तब रामचन्द्र जी ने राक्षसों का संहार किया था। आस्था पर कुठाराघात बर्दाश्त नहीं करना चाहिए। उसका सामना करना चाहिए, परिणाम कुछ भी हो। स्वामी जी ने कहा कि देश में चरित्र की पूजा होती है चित्र की नहीं। हम सप्त ऋषियो की संतान हैं। सभी के गोत्र ऋषियों के हैं। युवा वर्ग चरित्र को मजबूती प्रदान करे और राष्ट्र की रक्षा में आगे आये। उन्होने राजेश श्रीवास्तव बच्चा भइया को इस अवसर पर चित्रगुप्त भगवान अखाड़ा परिषद का प्रदेश संयोजक घोषित किया।
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धार्मिक स्वाभिमान को बचाने की जरूरत : स्वामी चक्रपाणि



