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संघ का वर्ष प्रतिपदा उत्सव व पथ संचलन आयोजित

जौनपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की ओर से वर्ष प्रतिपदा उत्सव एवं पथ संचलन का आयोजन बीआरपी इंटर कॉलेज परिसर में किया गया। कार्यक्रम...
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जौनपुर की अदबी दुनिया के सूफी संत थे अजय कुमार

जौनपुर। आज हिंदी भवन के अजय कुमार सभागार में स्मृति सभा ‘याद- ए- अजय कुमारÓ का आयोजन जन संस्कृति मंच द्वारा किया गया। इस आयोजन में उत्तर प्रदेश के कई शहरों से उनके चाहने वाले कवि, पत्रकार, गायक, विभिन्न कला विधाओं के लोग शामिल हुए। कार्यक्रम का प्रारम्भ फिल्मकार एवं प्रतिरोध का सिनेमा के संयोजक संजय जोशी द्वारा दस्तावेजी साक्षात्कार के प्रदर्शन से हुआ। इस साक्षात्कार में अजय कुमार भाकपा माले और जन संस्कृति मंच से जुड़ने का संस्मरण साझा करते हुए जौनपुर शहर की साझी संस्कृति और विरासत के बारे में बटनकरते हैं। इसके बाद बयार टीम के डीपी सोनी बंटू और अंकुर राय ने वामिक जौनपुरी की रचना $गम की नाव चलती है गाकर सुनाया। कार्यक्रम में दिल्ली से आए वरिष्ठ कवि देवी प्रसाद मिश्र, चर्चित कवयित्री रूपम मिश्र और युवा कवि शशांक ने अजय कुमार की कविताओं का पाठ किया। अजय कुमार की स्मृति को साझा करते हुए जाने माने आलोचक प्रो.अवधेश प्रधान ने कहा कि अजय ने एक-एक सांस निचोड़ कर सार्थक जीवन जिया। उन्होंने निस्पृह जीवन जिया। उन्होंने साहित्य-कला की तमाम विधाओं-कविता, चित्र, मूर्तिकला, अनुवाद, संस्मरण में काम किया। उनकी सांस्कृतिक रुचियों का छाप हिंदी भवन और तिलक पुस्तकालय में दिखती हैं। प्रधान ने कहा कि अजय कुमार को जौनपुर की मिट्टी, यहाँ के लोगों और साझी संस्कृति से गहरा प्यार था। इसलिए उन्होंने सबसे अधिक जौनपुर पर लिखा। पटना से आयीं महिलाओं की नाट्य संस्था कोरस की संयोजक समता राय ने अजय कुमार की सिक्कों के ज़रिए इतिहास की शिक्षा को याद किया। मशहूर कवि नरेश सक्सेना अजय कुमार को याद करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि यदि जौनपुर का ‘पानीÓ बचाना है तो अजय कुमार को याद करना जरूरी है। अपने जौनपुर में रहने के दौरान मुश्किल समय में जिस तरह अजय कुमार मेरे सतह साहस के साथ खड़े हुए और संबल दिया वो मुझे आजीवन याद रहेगा। समकालीन जनमत के प्रधान संपादक रामजी राय ने पार्टी यानि भाकपा माले के भूमिगत दिनों में उनसे हुई पहली मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा कि वे हिंदी उर्दू दोनों की साझा जाती हैं और शामिल जौनपुरी को हिंदी में खासकर और उर्दू साहित्य जगत दोनों के लिए सामने ले आना महत्वपूर्ण है। कविता में वह अपनी आलोचना के साथ समाज की भी आलोचना करते हैं। लखनऊ से आए मूर्तिकार धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि वे चित्र कविता लेख ही नहीं गढ़ते थे, मनुष्य भी गढ़ते थे। पटना से आयीं महिलाओं की नाट्य संस्था कोरस की संयोजक समता राय ने अजय कुमार की सिक्कों के ज़रिए इतिहास की शिक्षा को याद किया। अमेठी के अग्रेसर में सावित्री बाई फुले पुस्तकालय का संचालन कर रहीं शिक्षिका ममता सिंह ने कहा कि जब भी जौनपुर को याद किया जाएगा अजय जी को भी याद किया जाएगा। जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कौशल किशोर ने कहा की अजय कुमार ने हम लोगों को चीनी साहित्य से परिचय कराया। उन्होंने हिंदी-उर्दू की साझी परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए अथक कार्य किया। धन्यवाद ज्ञापन जन संस्कृति मंच, उत्तर प्रदेश के सचिव डॉ.रामनरेश राम ने किया। कार्यक्रम का संचालन कर रहे समकालीन जनमत के संपादक के के पांडेय ने कहा कि अजय कुमार लोकतंत्र को व्यवहार में सिखाने वाले व्यक्ति थे। स्मृति सभा में भाकपा माले के पूर्व विधायक विनोद सिंह, मोहम्मद हसन पीजी कालेज के प्राचार्य अब्दुल कादिर, वाराणसी से आए लेखक वीके सिंह, बीएचयू आईआईटी के प्रोफेसर प्रशांत शुक्ल, जन संस्कृति मंच के महासचिव मनोज कुमार सिंह, बुजुर्ग गायक आज़ाद, आरवाईए के महासचिव नीरज, कवयित्री प्रतिमा मौर्य, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अध्यापक प्रेमशंकर सिंह, सुनील विक्रम सिंह, सोनभद्र से आये अजय विक्रम सहित शहर के सैकड़ों लोग उपस्थित थे।

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