- बड़े भाई की तहरीर पर ग्राम प्रधान समेत 6 के विरुद्ध मुकदमा दर्ज, तलाश में दबिश
- आधा दर्जन संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही पुलिस
- दीवानी कचहरी में वकालत भी करता था मृत योगेश कुमार यादव
जौनपुर धारा, बदलापुर। नगर पंचायत के वार्ड नंबर 14 के सभासद, थाने के हिस्ट्रीशीटर और दीवानी न्यायालय में वकालत करने वाले 32 वर्षीय योगेश यादव की सोमवार की रात दुस्साहसिक हत्या के पीछे वजह पुलिस चुनावी बताई जा रही है। मृत योगेश के भाई सर्वेश कुमार यादव की तहरीर पर ग्राम प्रधान समेत पांच नामजद व एक अज्ञात आरोपित के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर छानबीन में जुटी है। करीब आधा दर्जन संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।
बताया जाता है कि योगेश यादव बीती रात आठ बजे वाराणसी-लखनऊ हाईवे सुल्तानपुर स्थित राम-जानकी मोड़ तिराहा पर चाय की दुकान पर दो साथियों संग बैठकर चुनावी चर्चा कर रहा था। उसी समय बदलापुर की तरफ से बाइक पर सवार दो नकाबपोश बदमाश पहुंचे। कोई कुछ समझ पाता इससे पहले ही बाइक पर पीछे बैठे बदमाश ने उसे लक्ष्य कर तीन राउंड गोलियां दागीं। बुरी तरह से घायल योगेश पश्चिम दिशा में आबादी की ओर भागने लगा, किंतु करीब 50 मीटर दूर जाने के बाद गिरकर छटपटाने लगा। पीछा कर रहे बदमाशों ने गिरने के बाद योगेश के सिर में गोली मार दी और खेतों की पगडंडी से होते हुए फोरलेन बाईपास पर चढ़कर भाग गए। खबर लगते ही मौके पर पहुंचे सर्वेश यादव आनन-फानन योगेश को जिला अस्पताल ले गए। वहां डाक्टरों ने देखते ही मृत घोषित कर दिया। पता चलते ही घर में कोहराम मच गया। सर्वेश की तहरीर पर पुलिस ने पट्टी दयाल गांव के प्रधान पुष्पेंद्र दुबे उर्फ बंटी, पंकज शुक्ला, पिंटू शुक्ला, श्रीकांत शुक्ला, फूलचंद विश्वकर्मा निवासी सरोखनपुर व एक अज्ञात आरोपित के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया। आरोपितों की तलाश में पुलिस टीमें संभावित स्थानों पर दबिश दे रही हैं। थाना प्रभारी निरीक्षक योगेंद्र सिंह ने बताया कि मौका-ए-वारदात से 32 बोर के चार खोखे मिले हैं। आरोपितों को शीघ्र गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
योगेश के विरुद्ध दो थानों में दर्ज हैं 28 मुकदमे
- मृत योगेश यादव के विरुद्ध बदलापुर व बक्शा थानों में हत्या के प्रयास, छिनैती, लूट, चोरी समेत विभिन्न धाराओं में 28 मुकदमे दर्ज हैं। पहला चोरी का मुकदमा वर्ष 2013 में बक्शा थाने में दर्ज हुआ था।
- एक दिसंबर को जेल से जमानत पर छूटा था योगेश योगेश को तनिक भी आभास होता कि जेल के बाहर मौत उसका इंतजार कर रही है तो वह जमानत ही नहीं कराता। हत्या के प्रयास के मामले में 28 अक्टूबर को जेल गया योगेश एक दिसंबर को ही जमानत पर छूटकर आया था।



