- शहर के मध्य बना हुआ है बारूद का गोदाम, अनहोनी की आशंका
- प्रशासन की तरफ से नही अधिकृत किया गया है पटाखा बेचने का स्थान
जौनपुर धारा, जौनपुर। शहर में घर गोदाम और व्यस्त इलाकों में भी दुकानों में खुलेआम पटाखे बिक रहे हैं। मिनी स्टेडियम को पटाखों की बिक्री के लिए अधिकृत करने के बाद भी शहर के थोक व्यापारी नियमों को ताक पर रखकर अवैध रूप से पटाखे बेच रहे हैं। सूत्रों की माने तो कुछ क्षेत्रों में देसी बम भी बनाया जाता है। नगर के व्यापारी चोरी छिपे टिकरा के देसी बम खरीदते थे। हालांकि दुकानादारों ने अपनी दुकानों पर अग्नि सुरक्षा यंत्रों को रखा है लेकिन नगर में विगत वर्षों में हुए हादसों से यह व्यवस्थाएं नाकाफी लगतें हैं। इसके पूर्व जौनपुर जिले में कई बड़े हादसे हो चुके है। जिसके जिम्मेदार कहीं न कहीं यह थोक पटाखा व्यवसाई ही हैं। भारत सरकार के विस्फोटक अधिनियम 1984 और विस्फोटक विनियम 2008 के अध्याय 7 में आतिशबाजी की स्थायी व अस्थायी दुकानों के लिए नियम हैं। थोक लाइसेंस धारक इनका पालन करने को बाध्य हैं। नियम 83 के अनुसार पटाखा बिक्री की स्थायी दुकान कंक्रीट से बनी हुई हो। आकार 9 वर्गमीटर से ज्यादा और 25 वर्गमीटर से कम होना चाहिए। दुकान में कोई बिजली उपकरण, लैंप, बैटरी या चिगारी पैदा करने वाला समान नहीं होना चाहिए। जगह भी वह हो जहां अग्निशमन वाहन तत्काल पहुंच सके। लेकिन दीपावली से पहले इतने कम समय में शहर के बाहर शिफ्ट होने में परेशानी और बहानेबाजी के बाद व्यवसायी जिला प्रशासन के नियमों की ही धज्जियां उड़ा रहे हैं। दरअसल प्रशासन ने अभी तक शहर में पटाखा बेचने वालों के लिए स्थानी अधिकृत नहीं किया है और रिटेल कारोबारी अपने-अपने दुकानों से पटाखे बेच रहे हैं। लेकिन शहर में पटाखों के थोक व्यापारी अपने घर से लेकर दुकान और गोदाम में भी पटाखे बेच रहे हैं। किसी भी तरह के पटाखों एवं विस्फोटकों के भंडारण वाली जगहों में बिजली कनेक्शन नहीं होना चाहिए और लोगों की आवाजाही से भी इसे दूर रहना चाहिए लेकिन इन सब सुरक्षा मानकों को दरकिनार कर पटाखे बेचें जा रहें हैं। जिले सहित नगर में कटघरा व तहसील मड़ियाहूँ जैसे विक्राल कांड को जौनपुर अभी भुला नही पाया है। लेकिन घनी आबादी में पताखा बेच रहें यह व्यवसाई घनी आबादी वाले बाजारों में दुकान व गोदाम बनाकर अपने परिवार सहित क्षेत्र की आम जनता के जीवन के साथ खेलवाड़ कर रहें हैं।



