जौनपुर। जनजागरण यात्रा के 83वें पड़ाव पंकज महाराज ने सत्संग सन्देश में जयगुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था मथुरा के राष्ट्रीय अध्यक्ष संत पंकज महाराज ने कहा कि यह सत्संग है, कोई कथा कीर्तन नहीं। कोई ढोल मंजीरा नहीं। यहां तो केवल प्रभु की भक्ति करने की प्रेरणा जगाई जाती है। प्रभु के भजन में साधू नहीं बनना होता है। आप गृहस्थ जीवन में रहें, बाल-बच्चों में रहें। खेती दुकान दफ्तर का काम मेहनत ईमानदारी से करते हुये चौबीस घण्टे में से एक घण्टा सुबह, एक घण्टा शाम को किसी जगे हुये महात्मा से कलयुग की सरल साधना ‘सुरत शब्द योगÓ की साधना का भेद लेकर साधना कर लें। इस क्रिया से आपकी आत्मा मरने के बाद अधोगति में नहीं जायेगी। रामायण में भी प्रमाण मिलता है कि ‘कलयुग योग न यज्ञ न ज्ञाना, एक आधार नाम गुन गाना।Ó यही रास्ता कबीर, नानक, पलटू दास, मीराबाई, सहजोबाई आदि का रहा। हमारे गुरु महाराज परम संत बाबा जयगुरुदेव महाराज ने इसी नाम भेद को देकर देश में करोड़ो लोगों के दुर्व्यसनों, तीर, तलवार, बन्दूकें छुड़ाकर उनके हाथों में भगवान के भजन की माला पकड़ा दी और सच्चा साधू बना दिया। महाराज ने आगे कहा कि वर्तमान में मांसाहार का चलन व्यापक तौर पर चल रहा है, जो स्वास्थ्य और धार्मिक दृष्टि से भी अहितकर है।
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केवल प्रभु के भजन से कोई साधू नहीं बनता : पंकज महाराज



