जौनपुर। बीते 25 अगस्त को मछलीशहर पड़ाव पर हुए हृदय विदारक घटना ने तीन जिंदगियां काल के गाल में समा गई। इस घटना में मृत प्राची मिश्रा, समीर और शिवा की दर्दनाक मौत में जिम्मेदारी तय करते हुए अवर अभियंता विद्युत विभाग व अवर अभियंता नगर पालिका को निलंबित तो कर दिया गया। वहीं घोर लापरवाही में असर जिम्मेदारों पर अभी तक पहचान नहीं की जा सकी।
बताते चलें कि बीते 25 अगस्त को सायं अतिवृष्टि और जलजमाव के कारण मछलीशहर पड़ाव के पास विद्युत पोल में करेंट आने से तीन लोगों की मृत्यु हो गई थी, जिसमें एक व्यक्ति का शव मौके से ही बरामद कर लिया गया था तथा दो व्यक्तियों के शव एसडीआरएफ और जिला प्रशासन के आपसी समन्वय और प्रयास से कल बरामद किया गया है, मृतकों का पोस्टमार्टम भी करा लिया गया है। जिनकी भी लापरवाही थी उनके खिलाफ कार्यवाही करते हुए त्रिस्तरीय समिति का गठन के रिपोर्ट पर अवर अभियंता विद्युत विभाग तथा अवर अभियंता नगर पालिका परिषद की स्पष्ट लापरवाही बताते हुए उनके निलंबन हेतु सक्षम अधिकारी को संस्तुति कर दी गई। वहीं विद्युत विभाग के एससी को निर्देशित किया गया है कि 24 घंटे के अंदर मृतक के परिजनों को नियमानुसार 7.50लाख (प्रति परिवार)की सहायता राशि उपलब्ध कराई जाए। प्रशासन की जाँच टीम ने रिपोर्ट सौंपकर अवर अभियंताओं पर कार्यवाही तो कर दी, लेकिन कहीं न कहीं जाँच रिपोर्ट में कुछ चीजे बची रह गई है।
जब फाइनेन्शियल पॉवर एस.ई.और एक्सीएन की तो कार्यवाही केवल जेई पर क्यों?
जानकारों की माने तो विभाग का फाइनेंशियल पॉवर केवल अधिशासी अभियंता व अधिक्षण अभियंता के पास होती है, और पोल लगाने से लेकर शिफ्टींग तक के कार्य की जिम्मेदारी संबन्धित ठेकेदार की होती है। बिजली विभाग जब भी कोई कार्य कराता है तो बकायदे पहले कार्ययोजना तैयार होती है और फिर उसका टेंडर कराया जाता है। जिसके बाद काम की शुरूआत की जाती है। घटना क्रम में यह साफ तौर पर देखा गया कि जिस पोल से करंट उतरा था वह काफी समय पहले की उक्त स्थान पर स्थापित किया गया था। लेकिन घटना के पहले तक उस पर तारों की शिफ्टींग नहीं कराई गई थी। जबकि पोल स्थापित करने से लेकर तार शिफ्टींग का ठेका एक साथ ही किया जाता है, तब जाकर ठेकेदार का फण्ड अवमुक्त किया जाता है। जिस पोल से करंट प्रवाहित हुआ उस पर कोई तार नहीं था, और वह पोल ठेढ़ा होकर ११००० हाई वोल्टेज तार को स्पर्श कर रहा था, जिसके कारण यह घटना घटी। अब सवाल यह उठता है कि जब पोल स्थापित किया गया तो उसकी शिफ्टींग क्यों नहीं कराई गई? और ठेकेदारों ने काम उधूरा क्यों छोड़ा? इन दोनों सवालों से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि यदि ठेकेदार ने काम अधूरा छोड़ा तो विभाग से पैसा कैसे अवमुक्त हुआ यदि पैसा अवमुक्त नहीं भी हुआ तो विभाग ने मामले में इतनी बड़ी लापरवाही कैसे कर दी। बता दें कि नगर क्षेत्र में अधिकांश ऐसे पोल स्थातिप है जिसपर शिफ्टींग का कार्य अभी भी अधूरा है।
हादसे के बाद चेता विद्युत निगम, खम्भे पर शिफ्ट किए गए तार
मछलीशहर पड़ाव पर सोमवार को हुए हादसे के बाद विद्युत निगम की सक्रियता बढ़ गई है। घटनास्थल पर लगे जर्जर बिजली के खम्भे से तार को नए खम्भे पर शिफ्ट कर दिया गया। इसके अलावा जर्जर तार भी बदल दिए गए। शहर के कोतवाली क्षेत्र के मछलीशहर पड़ाव पर सोमवार की शाम करंट से व नाले में बहने से तीन लोगों मौत हुई थी। यहाँ पर दो खम्भे पहले ही लगाए थे, लेकिन तार नहीं शिफ्ट किए गए थे। बुधवार की सुबह घटनास्थल पर लगे जर्जर बिजली के खम्भे से तार को हटाकर नए खम्भे पर शिफ्ट किया गया। इसके अलावा जर्जर तार बदलकर नए तार लगा दिए गए।



