

जेब्रा सामूहिक विवाह…
- मोहम्मद हसन महाविद्यालय के मैदान में सभी रस्में हुई पूरी
- कुलपति व जिलाधिकारी ने वर-वधू को दिया आशीर्वाद
- हर तीसरे वर्ष जेब्रा फाउंडेशन करता है यह आयोजन
जौनपुर धारा, जौनपुर। शहर में लोगों को रविवार को अद्भुत वरयात्रा देखने को मिली। मौका था सामाजिक व रचनात्मक संस्था जेब्रा फाउंडेशन के महायज्ञ रूपी दहेज रहित सामूहिक विवाह का। एक साथ 62 दूल्हों की वर यात्रा नव दुर्गा शिव मंदिर परिसर, नखास से शुरू होकर मुख्य मार्गों से होती हुई आयोजन स्थल मोहम्मद हसन पीजी कालेज सुक्खीपुर के मैदान में पहुंची। वहां 62 जोड़े हिंदू रीति-रिवाज से दांपत्य सूत्र में बंधकर जीवन साथी बन गये। जेब्रा अध्यक्ष संजय सेठ ने बताया कि वर व कन्या पक्ष की ओर से 20-20 लोगों को आमंत्रित किया गया था। आयोजन स्थल पर ही इनके जलपान व भेजन की भी व्यवस्था की गई थी। जीवन साथी बनने वालों को संस्था ने उपहार में दुल्हन को मांगटीका, नथिया, मंगलसूत्र, झुमका, अंगूठी, पायल-बिछिया, चुनरी, साड़ी सेट, शाल, स्वेटर व सौंदर्य प्रसाधन बाक्स तो वहीं दूल्हे को कलाई घड़ी, दो सेट कपड़ा, कन्हावर, अंगूठी व चेन उपहार स्वरूप प्रदान किये गये। इसके साथ ही गैस सिलेंडर चूल्हा, सिलाई मशीन, बर्तन, कुकर, दीवार घड़ी, फोल्डिंग चारपाई, कंबल, गद्दा, तकिया, बेडशीट, स्टील बाक्स, बैना भी दिया गया। वर-वधू को आशीर्वाद देने वालों में पूविवि की कुलपति प्रो. निर्मला एस. मौर्य, जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा, भारतीय शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी नागेन्द्र सिंह, मोहम्मद हसन पीजी कालेज के प्राचार्य डा. अब्दुल कादिर खान, नपा के पूर्व चेयरमैन दिनेश टण्डन, गहना कोठी फर्म के अधिष्ठाता विवेक सेठ मोनू, समाजसेवी मनोज अग्रहरि, सपा नेत्री पूनम मौर्या, भेजपुरी अभिनेता चंदन सेठ, समाजसेवी उर्वशी सिंह, गप्पू मौर्या, राकेश श्रीवास्तव, सोमेश्वर केसरवानी, पूर्व विधायक सुरेन्द्र प्रताप सिंह, प्रिंस सेठ, सुधीर साहू, सुभाष गर्ग आदि रहे।
- बहनों की शादी में आई दिक्कत तो लिया सामूहिक विवाह का संकल्प
जेब्रा फाउंडेशन के अध्यक्ष संजय सेठ मिसाल हैं उन युवाओं के लिए जो समाज के लिए कुछ करने का जज्बा रखते हैं। संजय सेठ की उम्र महज 18 वर्ष थी जब चार अगस्त 1993 को मां मालती देवी व 16 नवंबर 1994 को पिता श्याम लाल सेठ स्वर्ग सिधार गए। सवा साल के अंतराल में मां की ममता का आंचल और सिर से पिता का साया छिन गया। श्याम लाल सेठ अपनी सात संतानों में दो बड़ी बेटियोें बिंदू व इंदू की शादी कर चुके थे। किशोरवय संजय सेठ के कंधे पर छोटी बहनों मनीषा, श्वेता, खुशबू व भाई अमरनाथ सेठ के पालन-पोषण व शिक्षा-दीक्षा का बोझ आन पड़ा। श्वेता व खुशबू की शादी में आई दिक्कतों के बाद संजय सेठ ने अपनी तरह की ही सोच रखने वाले 13 युवाओं को प्रेरित कर जेब्रा…आशा की ज्योति संगठन की नींव रखी। संस्था के नेक कार्य में समाज के लोग खास तौर पर व्यवसायी वर्ग तन-मन-धन से सहभागिता करते हैं। संस्था के मार्गदर्शक की भूमिका में स्थापना काल से ही जुड़े हैं सेवानिवृत्त आइएएस एनपी सिंह। तब से हर तीसरे वर्ष संस्था सामूहिक विवाह का आयोजन करती है और अब तक करीब छह सौ कन्याओं के दुल्हन बनकर पिया के घर जाने के सतरंगी सपने को मूर्त रूप दे चुकी है।



