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Homeअपना जौनपुरबिना स्टीमेट के विभाग आवांटन कर रहा लम्बी दूरी का कनेक्शन

बिना स्टीमेट के विभाग आवांटन कर रहा लम्बी दूरी का कनेक्शन

  • खुले बॉक्स भी राहगीरों को दे रही चुनौती, सांसत में जान

जौनपुर। बिजली विभाग के उदासीनता के कारण उपभोक्ता को हमेशा से परेशनी झेलनी पड़ा है। कहीं घूस लेकर लम्बी दूरी पर बिजली कनेक्शन दिया गया है तो कहीं बीच सड़क पर खुले बिजली के बॉक्स यमराज बन अपने शिकार की प्रतीक्षा कर रहें है। बिजली विभाग के अधिकारी से लेकर कर्मचारियों तक पर हर बार कार्य के बदले सुविधा शुल्क लेने-देने का आरोप लगता रहा है। कई बार तो विभागीय घूस लेते रंगे हाथ पकड़े भी गये हैं। लेकिन लेन-देन का शिलशिला कभी रूका नहीं।

बताते चलें कि बिजली कनेक्शन देने के लिये विभाग की पूरी टीम लगी रहती है, जो आवेदन करने के बाद से ही स्थलीय निरीक्षण से लेकर कनेक्शन देने तक में घूस प्राप्ति की आस में रहती है। यहीं नहीं अगर कोई कम्प्लेन आती है तो लोगों के घरों का बिजली आपूर्ति बहाली के लिये भी लेन-देन की बात होती रहती है। इस काम में जूनियर इंजीनियर, फीडर मैनेजर व लाइनमैन की भूमिका सबसे अधिक होती है। जौनपुर में 40 मीटर से ज्यादा दूरी पर कनेक्शन दिए जाने की जांच की जाये तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा। अक्सर घर से पोल की दूरी ज्यादा होने के कारण लोगों को स्टीमेट पकड़ा दिया जाता है और ही यह ऑप्शन भी रख दिया जाता है यदि स्टीमेट का आधा पैसा भी दे दिया जाये तो कनेक्शन मिल सकता है, और फिर लेन-देन का खेल शुरू कर दिया जाता है।

दो सौ मीटर लंबा तार खींच कर आवंटन कर दिया कनेक्शन

लंबी दूरी पर बिजली कनेक्शन की लागत निश्चित नहीं होती और यह कई कारकों पर निर्भर करती है। खुले बिजली बॉक्स के संबंध में, यह एक गंभीर सुरक्षा उल्लंघन है जिसके लिए जुर्माना और कानूनी कार्रवाई हो सकती है। लंबी दूरी के बिजली कनेक्शन की लागत का अनुमान लगाने के लिए स्थानीय बिजली विभाग स्टीमेट बनाकर आवश्यक सामग्री और बुनियादी ढांचे पर निर्भर करता है। यदि परिसर से मौजूदा बिजली के खंभे (पोल) या ट्रांसफॉर्मर की दूरी एक निश्चित सीमा (आमतौर पर 40 मीटर तक) से अधिक है, तो अतिरिक्त खंभों और तारों की लागत उपभोक्ता को वहन करनी पड़ सकती है। लेकिन जौनपुर के पानदरीबा से सदर इमामबाड़ा रोड़ पर इस नियम को बिल्कुल ताख पर रखकर धड़ल्ले से कनेक्शन का आवांटन कर दिया गया है, और कोई स्टीमेट भी नहीं बना है। मजे की बात तो यह है कि बिजली के पोल भी दौड़ा दिया गया, लेकिन उसपर एलटी या एचटी केबल नहीं दौड़ सकी। इलाजा आरोप है भी है कि प्रत्येक कनेक्शन पर पांच से दस हजार तक का घूस भी चला है।

खुले बिजली के बॉक्स दे रहें चुनौती

नगर क्षेत्र के अधिकाश क्षेत्र में अभी भी खुले पोल आमजन को चुनौती दे रहें हैं। जिससे करंट लगने का खतरा बढ़ गया है। नगर के लगभग हर मार्ग पर यह दशा आसानी से देखी जा सकती है। ये बॉक्स बच्चों व छुट्टा पशुओं के लिये जान का खतरा बना हुआ है। विभाग इन मामलों जल्द नहीं चेता तो आगे मछलीशहर पड़ाव जैसी घटनाएं फिर से हो सकती है।

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