मुरादाबाद: कहते हैं कि कुछ कर दिखाने का जज्बा हो तो हिम्मत नहीं हारनी चाहिए. चाहे वह कोई भी उम्र क्यों ना हो. ऐसा ही कुछ कर दिखाया है एमआईटी विश्वविद्यालय की छात्रा कनिष्का और ऋषि सक्सेना ने. छात्रा कनिष्का को बचपन में करंट लग गया था. जिसे उन्होंने जवानी तक याद रखा और कुछ ऐसा करने की ठानी कि लोगों को करंट लगने से होने वाली घटनाओं और करंट की समस्या से निजात दिलाई जा सके. उन्होंने अपने साथी ऋषि सक्सेना के साथ मिलकर आईओटी बेस्ड सप्लाई कंट्रोल सिस्टम बनाया है. जिसकी मदद से मैनुअली सप्लाइ कंट्रोल की जा सकती है.
बीटेक की छात्रा कनिष्का ने बताया कि हमने आईओटी बेस्ड सप्लाई कंट्रोल सिस्टम बनाया है. जब मैं 4 से 5 साल की थी तब मैं एक इलेक्ट्रिक पोल के पास खेल रही थी. एवं बारिश का मौसम था. जिसमें गलती से मेरा हाथ लगने से करंट लग गया था. मुझे बचाने आई मेरी सिस्टर को भी करंट लग गया था. फिर वहां से एक स्वीपर जा रहे थे. उन्होंने हमें वुडन स्टिक की मदद से बचाया था. फिर हमने सोचा कि करंट के केसेस बहुत सारे आते हैं. बहुत से न्यूज़ चैनल न्यूज़ में यह भी दिखाते हैं कि जो इलेक्ट्रीशियन होते हैं. इलेक्ट्रिक पोल पर चढ़ते हैं. वह सब स्टेशन पर फोन करके कह देते हैं कि सप्लाई बंद कर दीजिए. सप्लाई बंद होने के बाद गलती से यदि सप्लाई चालू हो जाती है. तो पोल पर कार्य कर रहे व्यक्ति की मौत हो जाती है. जिसको लेकर हमने है प्रोजेक्ट बनाने की शुरुआत की थी. इस प्रोजेक्ट को बनाने में 1 महीने का समय लगा है. इसे बनाने में मेरे साथी ऋषि ने मेरी मदद की है और इसकी लागत करीब 1000 पहुंची है. कनिष्का ने बताया कि हमने एक ऐप बनाया है. इस ऐप की मदद से यदि कहीं भी करंट फैल जाता है. तो आसानी से फोन के माध्यम से सप्लाई बंद कर लोगों की जान बचाई जा सकती है. ऋषि सक्सेना ने बताया कि जो लोग इलेक्ट्रिक पोल पर चढ़कर काम करते हैं. या बिजली का कोई भी कार्य करते हैं. उसी कार्य के दौरान उनकी करंट की चपेट में आने से मौत हो जाती है. इस तरह की मौतों को कम करने के लिए और करंट की समस्या से निजात दिलाने के लिए हमने यह आईओटी बेस्ड सप्लाई कंट्रोल सिस्टम बनाया है.



