जौनपुर। इडुनिक पब्लिकेशन एंड रिसर्च सेंटर, नईगंज द्वारा बाल शिक्षा पर आधारित दो दिवसीय प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। समारोह में प्रकाशित चार पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। इनमें तीन पुस्तकें—शैक्षिक दर्शन, शैक्षिक मनोविज्ञान और बाल्यावस्था एवं उसका विकास—चीफ एडिटर डॉ.अरविंद कुमार यादव द्वारा प्रकाशित की गईं, जबकि एक पुस्तक इक्कीसवीं सदी में डॉ. उमेंद्र कुमार द्वारा लिखी गई। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई, इसके बाद प्रदर्शनी का उद्घाटन प्रो.मोतीलाल गुप्त ने फीता काटकर किया। दस वर्ष से कम उम्र के बच्चों को कापी-कलम भेंट किए गए, जिन्हें प्रो. अजय कुमार चतुर्वेदी, विकास यादव, डॉ. अरविंद कुमार यादव सहित अन्य अतिथियों ने सम्मानित किया। मुख्य अतिथि पूर्व वीसी, बीर टिकेंद्रजीत विश्वविद्यालय, इंफाल प्रो. अजय कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि सामाजिक समझ और नैतिक शिक्षा भी शिक्षा का अहम हिस्सा हैं। एजुकेशन डीन पीयू प्रो.अजय कुमार दुबे ने कहा कि प्रत्यक्ष शिक्षा का स्थान तकनीकी माध्यम नहीं ले सकता। प्रो.राकेश कुमार यादव ने बताया कि एआई और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बच्चों में संस्कार विकसित नहीं कर सकते, इसके लिए किताबें और अभिभावक की भूमिका महत्वपूर्ण है। प्रो.राजबहादुर यादव ने कहा कि डिजिटल युग में भी पुस्तकों का महत्व कम नहीं है। अध्यक्षता कर रहे प्रो. मोतीलाल गुप्त ने बच्चों के भावनात्मक विकास में डिजिटल प्लेटफॉर्म की बाधा पर जोर दिया। कार्यक्रम में डिजिटल पुस्तकालय, बेलापार और लिटिल फ्लावर किड्स कैंपस स्कूल नईगंज का विशेष योगदान रहा। समारोह में कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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बाल शिक्षा पर दो दिवसीय प्रदर्शनी का उद्घाटन, चार नई पुस्तकें प्रकाशित



