- शौचालय तोड़कर बना दिए दफ्तर, गेट पर पेशाब करने को मजबूर जनता
जौनपुर। जौनपुर नगर पालिका परिषद के परिसर में अव्यवस्था और सुविधाओं की कमी को लेकर स्थानीय लोग नाराज़ हैं। पारिसर में सबसे बड़ी समस्या यह है कि पहले यहाँ सार्वजनिक शौचालय था, लेकिन उसे तोड़कर कुछ कार्यालय बना दिए गए। अब कार्यालय आने वाले लोग मजबूरी में मुख्य गेट के पास पेशाब करने को मजबूर हैं, जिससे परिसर की स्वच्छता और नागरिकों की सहूलियत पर असर पड़ा है।

नगर पालिका परिसर में पहले फरियादियों और आम नागरिकों की सुविधा के लिए शौचालय की व्यवस्था थी। लेकिन प्रशासनिक अदूरदर्शिता का आलम यह रहा कि उस पुराने शौचालय को तुड़वा दिया गया। हैरानी की बात यह है कि उस जगह को खाली करने के बजाय वहाँ नए कार्यालय बना दिए गए। जनता के स्वास्थ्य और सुविधा की बलि चढ़ाकर ईंट-गारे के कमरे तो खड़े कर दिए गए, लेकिन यह नहीं सोचा गया कि परिसर में आने वाले सैकड़ों लोग कहाँ जाएंगे। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर पालिका स्वयं स्वच्छता और सुविधाओं का दावा करती है, लेकिन अपने ही कार्यालय परिसर में शौचालय की कमी प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करती है। इसके अलावा, नगर पालिका में सरकारी धन से लगे फिंगरप्रिंट अटेंडेंस डिवाइस लंबे समय से काम नहीं कर रहे हैं और केवल शोपीस बनकर रह गए हैं। यदि इन्हें सही ढंग से उपयोग किया जाए, तो कर्मचारियों की उपस्थिति और समयबद्धता पर नियंत्रण रखा जा सकता है। स्थानीय लोग उम्मीद करते हैं कि नगर पालिका प्रशासन इन समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए जल्दी कदम उठाएगा। दूर-दराज के गांवों और मोहल्लों से आने वाले फरियादी, खासकर बुजुर्ग और अनजान लोग, मजबूरी में नगर पालिका के मुख्य गेट के ठीक बगल में पेशाब करते हैं। नगर पालिका का प्रवेश द्वार अब एक ‘ओपन यूरिनलÓ में तब्दील हो चुका है। परिसर में दाखिल होते ही सड़ांध और दुर्गंध का सामना करना पड़ता है, जो यहाँ काम करने वाले कर्मचारियों और आने वाले नागरिकों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है।
नागरिकों की मांग
- परिसर में तुरंत सार्वजनिक शौचालय की व्यवस्था की जाए
- स्वच्छता बनाए रखने के लिए उचित इंतज़ाम किए जाएँ
- फिंगरप्रिंट मशीनें चालू करके उपस्थिति प्रणाली पारदर्शी बनाई जाए
सरकारी धन की बर्बादी: ‘शो-पीस’ बनी फिंगर प्रिंट मशीनें
सुविधाओं को खत्म करने के साथ-साथ यहाँ तकनीक के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग भी साफ दिखाई देता है। कर्मचारियों की हाजिरी के लिए लगाई गई बायोमेट्रिक (फिंगर प्रिंट) डिवाइस महीनों से सफेद हाथी बनी हुई हैं। करोड़ों के बजट वाली इस नगर पालिका में ये मशीनें काम नहीं कर रही हैं।



