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Homeअपना जौनपुरडॉक्टर से नर पिशाच बनने की प्रमुख वजह

डॉक्टर से नर पिशाच बनने की प्रमुख वजह

  • दवा कंपनियों से मिल रही मोटी रकम और सौगातें
  • अवैध हॉस्पिटलो पर ईलाज के दौरान भले मरे मरीज, मगर साहब को चाहिए कमीशन
  • सिर्फ कागजों में ही सिमट जाता हैं निरीक्षण और जांच, कारवाई का नाम सिर्फ हवाये-हवाई
  • अस्पतालों और निजी क्लिनिकों में कमीशन की यह बीमारी तेजी से फैल चुकी है

रामसरन यादव

केराकत। कभी समाज में भगवान का दर्जा पाने वाले डॉक्टर आज कई जगह नर पिशाच कहे जाने लगे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण दवा कंपनियों से मिल रही मोटी रकम, उपहार, विदेश यात्राएँ और कमीशनखोरी की अंधी दौड़ बताई जा रही है। इंसानियत, सेवा और कर्तव्य का जो पेशा कभी श्रद्धा का प्रतीक था, वही अब पैसे कमाने की मंडी बनता जा रहा है। हाल यह है कि डॉक्टरों के लिए मरीज अब इंसान नहीं बल्कि ग्राहक बन चुका हैं। इलाज से ज़्यादा ध्यान इस बात पर रहता है कि कौन-सी कंपनी की दवा लिखने पर कितनी मोटी कमाई होगी। कई दवा कंपनियाँ डॉक्टरों को हर महीने लाखों रुपए के कमीशन, महंगे गिफ्ट, विदेशी टूर, और परिवार के लिए सुविधाएँ देती हैं। बदले में उनसे उम्मीद रहती है कि वही उनकी दवाइयाँ मरीजों को लिखें, चाहे वे ज़रूरी हों या नही।

इन लोभ के रिश्तों ने डॉक्टरों के दिल से मानवता को धीरे-धीरे खत्म कर दिया है। जहाँ कभी डॉक्टर की नजर में मरीज की तकलीफ होती थी, आज वहाँ मुनाफे का हिसाब होता है। गरीब मरीज, जो कुछ रुपए की सस्ती दवा से ठीक हो सकता है, उसे हजारों रुपए की ब्रांडेड दवा थमा दी जाती है, और यह हत्या दवा के नाम पर हो रही है।

मरीजों पर असर

मरीजों को ऐसी दवाएं दी जाती हैं जिनकी जरूरत नहीं होती, सिर्फ इसलिए कि डॉक्टर को लाभ मिले। गुणवत्ता की जांच में कमी और ऑडिट की कमी के कारण कई बार जहरीली या घटिया दवाएं बाजार में आ जाती हैं।

जेनेरिक दवाओं की अनदेखी

सस्ती और प्रभावी जेनेरिक दवाएं अक्सर नजरअंदाज की जाती हैं क्योंकि कंपनियों की ब्रांडेड दवाओं से अधिक कमीशन मिलता है।

राजनीतिक संरक्षण

कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि दवा कंपनियों ने राजनीतिक दलों को भारी चंदा दिया है, जिससे उन्हें सरकारी संरक्षण मिलता है। अस्पतालों और निजी क्लिनिकों में कमीशन की यह बीमारी तेजी से फैल चुकी है। मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स और डॉक्टरों के बीच हुआ यह गुप्त गठजोड़ मरीज की जेब और जान दोनों पर भारी पड़ रहा है। कई डॉक्टर कंपनियों से अनुबंध कर लेते हैं कि वे साल भर उनकी दवाओं की निश्चित मात्रा बेचेंगे, और लक्ष्य पूरा करने पर उन्हें इनाम मिलेगा। यह सौदा सेवा को व्यापार में बदल देता है। इस लूट में केवल डॉक्टर ही नहीं, अस्पताल संचालक और लैब संचालक भी शामिल हैं। अनावश्यक टेस्ट, महंगे पैकेज, और झूठी रिपोर्टें सब कुछ इस लालच की श्रृंखला का हिस्सा हैं। गरीब मरीज इलाज के नाम पर कर्ज में डूब जाते हैं। सही इलाज और सस्ती दवा से लोगों को वंचित रखा जाता है। चिकित्सा जगत की साख मिट्टी में मिलती जा रही है। लेकिन जब लालच सेवा पर भारी पड़ जाता है, तब भगवान रूपी डॉक्टर भी नर पिशाच बन जाता है और आज की चिकित्सा व्यवस्था इसका जिंदा उदाहरण है।

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