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जौनपुर का जेसीज चौराहा बना ‘अघोषित बस अड्डा’

  • ट्रैफिक पुलिस और एआरएम की चुप्पी से जनता बेहाल, डग्गामार और सरकारी बसों का कब्जा

जौनपुर। जौनपुर का हृदय स्थल कहा जाने वाला जेसीज चौराहा इन दिनों अव्यवस्था और सरकारी तंत्र की विफलता का जीवंत उदाहरण बन गया है। शहर के इस सबसे व्यस्ततम चौराहे पर रोडवेज और डग्गामार (प्राइवेट) बसों का ऐसा ‘आतंक’  है कि यहाँ से गुजरना किसी जंग जीतने से कम नहीं है। सुबह की पहली किरण से लेकर देर रात तक यहाँ भीषण जाम की स्थिति बनी रहती है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी गहरी नींद में सोए हुए हैं।

परिवहन विभाग के स्पष्ट निर्देश हैं कि सभी सरकारी और अनुबंधित बसों का परिचालन रोडवेज डिपो के भीतर से होना चाहिए। सवारी बैठाने और उतारने का कार्य डिपो परिसर के अंदर ही सुनिश्चित किया जाना चाहिए। जमीनी हकीकत इसके उलट है। स्थानीय डिपो की कुछ बसें तो शायद अंदर नजर आ जाएं, लेकिन आजमगढ़ और प्रयागराज मार्ग पर चलने वाली बसें डिपो के अंदर जाने की जहमत तक नहीं उठातीं। ये बसें जेसीज चौराहे के मुख्य मार्ग पर ही आड़ी-तिरछी खड़ी कर दी जाती हैं, जिससे पूरे क्षेत्र का आवागमन बाधित हो जाता है। रोडवेज और प्राइवेट बसों द्वारा बीच सड़क पर बसें खड़ी कर सवारी भरने के कारण यहाँ सुबह से लेकर देर रात तक भीषण जाम की स्थिति बनी रहती है। विडंबना यह है कि जिस चौराहे पर घंटों आवागमन बाधित रहता है, वहां तैनात ट्रैफिक पुलिस मूकदर्शक बनी रहती है।

ट्रैफिक पुलिस और एआरएम की ‘मौन’ सहमति?

हैरानी की बात यह है कि जिस चौराहे पर घंटों जाम लगा रहता है, वहां तैनात ट्रैफिक पुलिस के जवान मूकदर्शक बने रहते हैं। घंटों तक जनता जाम में जूझती रहती है, एम्बुलेंस और स्कूली बसें फंसी रहती हैं, लेकिन पुलिस इन बस चालकों पर कोई सख्त एक्शन नहीं लेती। स्थानीय नागरिकों का सीधा आरोप है कि इस घोर लापरवाही में सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक और ट्रैफिक पुलिस की मिलीभगत या उदासीनता साफ झलकती है। एआरएम कार्यालय महज कुछ दूरी पर होने के बावजूद इन बेलगाम बसों पर लगाम लगाने के लिए कोई ठोस योजना नहीं बनाई जा रही है।

जनता का बढ़ता आक्रोश

देर रात तक सड़कों पर खड़ी इन बसों के कारण राहगीरों, विशेषकर महिलाओं और बुजुर्गों को भारी असुरक्षा और परेशानी का सामना करना पड़ता है। व्यापार मंडल और स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि जिले की बसें डिपो जा सकती हैं, तो आजमगढ़ और प्रयागराज की बसों को बाहर खड़ा होने की छूट क्यों दी जा रही है? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? इस पूरे प्रकरण में प्रशासन की चुप्पी यह सवाल खड़ा करती है कि क्या जौनपुर की ट्रैफिक व्यवस्था केवल कागजों तक ही सीमित है? अगर जल्द ही इन बसों को डिपो के अंदर भेजने और चौराहे को अतिक्रमण मुक्त करने की कार्रवाई नहीं हुई, तो स्थानीय जनता उग्र आंदोलन के लिए विवश होगी।

नियमों की उड़ रही धज्जियां

परिवहन विभाग के नियमानुसार, सभी बसों का ठहराव और सवारी बैठाने का काम रोडवेज डिपो के अंदर से होना चाहिए। स्थानीय डिपो की कुछ बसें तो अंदर जाती भी हैं, लेकिन आजमगढ़ और प्रयागराज रूट की बसें डिपो के अंदर जाने की जहमत नहीं उठातीं। ये बसें जेसीज चौराहे के मुख्य मार्ग पर ही खड़ी हो जाती हैं, जिससे पीछे आने वाले वाहनों की लंबी कतार लग जाती है।

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