मिलाद शरीफ़ व नाते नबी जलसा सीरतुन्नबी का हुआ आयोजन
जौनपुर धारा, जौनपुर। माहे रबीउल अव्वल का चांद के बाद से ही पूरे शहर में जश्ने ईद मिलादुन्नबी की तैयारियां शुरू हो गई है। विद्युत की आकर्षक झालरों और रंग-बिरंगी पन्नियों से शहर को दुल्हन की तरह सजाया व संवारा जा रहा है।
28 सितम्बर को ईद मिलादुन्नबी पूरे अकीदत व शानो शौकत के साथ मनाया जाएगा। सेंट्रल सीरत कमेटी के तत्वावधान में कोतवाली चौराहा स्थित मरकजी सीरत कमेटी के कैंप कार्यालय पर सोमवार को सुबह 7 बजे से मिलाद शरीफ़ व नाते नबी जलसा सीरतुन्नबी का आयोजन हुआ। मिलाद के नौ वे दिन जलसे की शुरुआत तिलावते कलाम ए पाक से कारी जिया जौनपुरी पेश इमाम शेर मस्जिद शाही पुल ने किया। जिसमें उलमा ए इकराम ने दिल ईमान अफरोज तकरीर किया। नातिया शायरों ने नाते नबी का कलाम पेश किया। सरवरे कायनात पर दुरुद व सलाम भेजा गया। मिलाद की महफिल को खिताब करते हुए मौलाना कयामुद्दीन ने कहा कि हमारे नबी किसी एक कौम के लिए नहीं आए। आप को सारी इंसानियत के लिए भेजा गया। हम सभी उनके बताए हुए तरीकों पर चलते हुए पांच वक्त की नमाज कसरत से पढ़ने की मौलाना ने सलाह दी।
पूरी दुनिया में जाहिलियत का दौर था आका के आने के बाद गुमराही का अंधेरा छटा दीन की रोशनी सारे जहां में फैली और बुराइयों का खात्मा हुआ। मौलाना नसीम रजा, जौनपुरी व हसीन मीरमस्ती अहमद रजा, हामिद रजा ने नाते नबी गुनगुना कर पूरी महफिल में नारे तकबीर अल्लाह हू अकबर की सदाएं गूंजने लगी। इस मौके पर सेंट्रल सीरत कमेटी के सदर जावेद अजीम, संरक्षक असलम शेर खान, शकील मुमताज, मरकजी सीरत कमेटी के सदर मुन्ने राजा, साजिद अलीम, पूर्व सभासद इरशाद मंसूरी, मरकजी सीरत कमेटी के पूर्व खजांची शकील मंसूरी, पूर्व सदर हफीज शाह, जफर मसूद, शाहिद मंसूरी, सद्दाम हुसैन, नेयाज ताहिर, फिरोज अहमद पप्पू, अमजद, गुड्डू, समीर असलम अन्य उपस्थित रहे। अंत में आए हुए लोगों में तबर्रुक वितरित किया गया।


