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जन्मोत्सव की झांकी के साथ खानापट्टी में रामकथा का रसपान

सिकरारा। खानापट्टी गांव के रामलीला मैदान में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीरामकथा के तीसरे दिन गुरुवार को भगवान राम के जन्मोत्सव की मनोहारी झांकी ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। अयोध्याधाम से पधारे प्रख्यात कथावाचक संतोष शरण महाराज ने राम जन्मोत्सव के प्रसंग को अपनी मधुर वाणी और भक्ति-भाव से जीवंत कर दिया, जिसका श्रद्धालुओं ने जमकर रसपान किया। इस अवसर पर रामलीला मैदान में भक्ति का सैलाब उमड़ पड़ा। कथा के मुख्य यजमान जितेंद्र सिंह ने अपनी पत्नी के साथ व्यासगद्दी का पूजन और आरती कर कथा का शुभारंभ कराया। कथावाचक संतोष शरण महाराज ने भगवान राम के जन्मोत्सव की कथा को इस तरह प्रस्तुत किया कि श्रोता भक्ति के रंग में डूब गए। उन्होंने राम जन्म के प्रसंग को विस्तार से सुनाते हुए बताया कि कैसे अयोध्या में राजा दशरथ के पुत्र के रूप में भगवान राम का अवतरण हुआ, जिसने समस्त विश्व को धर्म और मर्यादा का पाठ पढ़ाया। कथा के दौरान मंच पर प्रस्तुत भव्य झांकी में राम जन्म के दृश्य को सजीव रूप में प्रदर्शित किया गया, जिसमें माता कौशल्या, राजा दशरथ और अन्य पात्रों का चित्रण देख श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो उठे। रामकथा के संरक्षक व समाजसेवी दिनेश सिंह की देखरेख में विद्वान पंडित उमेश शास्त्री महाराज आशुतोष महाराज व संगीतमय वाद्ययन्त्रों के साथ  उनकी टीम ने रामकथा में चारचांद लगा दिया। इस धार्मिक आयोजन में विधि-विधान के साथ किए गए पूजन ने वातावरण को और अधिक पवित्र बना दिया। इस अवसर पर समाजसेवी व पूर्व प्रधान बिनय सिंह, बीडीसी रजनीश सिंह निर्मल, प्रधान प्रतिनिधि सुशील सिंह, शिक्षक संघ के पूर्व जिलाध्यक्ष विजय बहादुर सिंह, सेवानिवृत्त शिक्षक अवधेश सिंह, जयप्रकाश सिंह, ओमनाथ सिंह, अरविंद सिंह नेता, अनिल सिंह, शैलेंद्र सिंह, विमल सिंह और शुभेंद्रू सिंह सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने सक्रिय योगदान दिया। इनके प्रयासों से आयोजन की भव्यता और व्यवस्था में चार चांद लग गए। रामकथा के तीसरे दिन का यह आयोजन न केवल भक्ति और आध्यात्म का संगम बना, बल्कि ग्रामीणों के बीच एकता और सामाजिक समरसता का भी प्रतीक बन गया। श्रद्धालु देर शाम तक कथा का रसपान करते रहे और भगवान राम के जीवन से प्रेरणा लेकर अपने जीवन को मर्यादित और धर्ममय बनाने का संकल्प लिया।

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