जौनपुर। अच्छे समाज के निर्माण के निमित्त 122दिवसीय शाकाहार-सदाचार, मद्यनिषेध एवं आध्यात्मिक-वैचारिक जनजागरण यात्रा लेकर पंकज महाराज ने ग्राम कयार में कहा कि करोड़ो जन्मों में भटकने के बाद न जाने किस महात्मा की अपार दया हो गई जो आप को यह मनुष्य शरीर मिल गया। अब इसको खाने-पीने, ऐश व इशरत, दुनिया बसाने में आप गँवाते जा रहे हैं। अब भी समय है, अपनी आत्मा के लिये भी कुछ धन जमा कर लो जो मरने के बाद आपके काम आवे। जब महात्मा महापुरुष मिलते हैं तो हमको समझा कर कहते हैं कि ऐ प्रेमियों! यह तुम्हारा देश नहीं। तुम्हारा देश सतदेश है, तुम्हारा नाम सतनाम है। तुम यहां माया की छाया के भूल भुलैया में फंस गये। जो कुछ भी आप यहां देख रहे हो या जमा कर रहो हो इसमें से सुई की नोक बराबर कोई भी सामान आप मौत के समय लेकर नहीं जा सकते। आपका सब कुछ यहीं श्मशान भूमि पर जलकर खाक हो जायेगा। यह कलयुग है इस युग की साधना अलग है। अन्य युगों की साधनायें भी अलग थीं। ‘सतयुग, त्रेता, द्वापर बीता, काहु न जानी शब्द की रीता। शब्द ही जीव को जगत में लाता है और षब्द ही भव से पार ले जाता है। महाराज ने देश में बदलती हुई हिंसा व अपराध की प्रवृत्ति पर चिन्ता व्यक्त करते हुये कहा कि सभी अपराधों की जननी षराब है। शराब पीने के बाद बुद्धि पागल हो जाती है, मां, बहन, बेटी की पहचान आंखों से समाप्त हो जाती है।
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करोड़ो जन्मों में भटकने के बाद मिला मनुष्य का जीवन : पंकज महाराज



