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Homeअपना जौनपुरएमएलसी बृजेश सिंह ने स्वयं दवा खाकर किया एमडीए अभियान का शुभारंभ

एमएलसी बृजेश सिंह ने स्वयं दवा खाकर किया एमडीए अभियान का शुभारंभ

  • दवा के प्रभाव के प्रति लोगों को किया आश्वस्त, डॉक्टरों को बताया भगवान का दूसरा रूप
  • बड़ी संख्या में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने भी खाई दवा

जौनपुर धारा, जौनपुर। अमर शहीद उमानाथ जिला चिकित्सालय परिसर में शुक्रवार को मुख्य अतिथि विधान परिषद सदस्य बृजेश कुमार सिंह प्रिंशू ने स्वयं फाइलेरिया से बचाव की दवा खाकर राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम एमडीए अभियान का शुभारंभ किया। इसके साथ ही अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राजीव कुमार, डॉ. एसपी मिश्रा, जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. बीपी सिंह, जिला कार्यक्रम प्रबंधक सत्यव्रत त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने भी दवा खाई।

एमएलसी बृजेश सिंह ने एमडीए अभियान की सफलता के लिए सभी से सहभागिता की अपील की। उन्होंने कहा कि अभियान को सफल बनाने के लिए आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को अपने सामने दवा खिलाएँगी। अभियान पर विश्वास जताते हुए डॉक्टरों को भगवान का दूसरा रूप बताया। इस दौरान डीएमओ डॉ. बीपी सिंह ने विस्तार से अभियान के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने निर्देशन पर अभियान से पहले आठ और नौ फरवरी को विद्यालयों में जाकर बच्चों को दवा खिलाई गई। आठ फरवरी को 20 हजार बच्चों को दवा खिलाई गई। उन्होंने बताया कि जनपद में 6.5 लाख से आठ लाख के बीच बच्चों को दवा खिलाने का लक्ष्य है लेकिन विद्यालयों में परीक्षा चल रही है। इण्टरमीडिएट के बच्चे बोर्ड परीक्षाओं की छुट्टी पर हैं। फिर भी आशा है कि अभियान के दौरान 4.5 लाख से ज्यादा बच्चों को दवा खिला ली जाएगी। उन्होंने बताया कि यह दवा शत-प्रतिशत सुरक्षित है। दवा का सेवन करने के बाद हमारी रैपिड रेस्पॉन्स टीम लाभार्थी पर निगाह रख रही है। एक दो घंटे वेट एंड वाच की नीति अपना रही है। किसी को कोई समस्या आने पर तुरंत निदान कर रही है। उन्होंने बताया कि दवा खाने के बाद किसी को चक्कर आना, उल्टी होना, जी मिचलाना जैसी दिक्कत हो रही है तो इसका मतलब उसके शरीर में फाइलेरिया के परजीवी मौजूद हैं। ऐसे लोगों के लिए यह दवा बहुत जरूरी है। यह दवा जाकर उस परजीवी को मारती है। अगर किसी को इस तरह के साइड इफेक्ट की आशंका है तो वह एंटीबायोटिक दवाएं ले सकते हैं। लगातार पांच वर्ष तक वर्ष में एक बार दवा खा कर कोई भी व्यक्ति फाइलेरिया से सुरक्षित हो सकता है।

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